‘कभी देश को असली आजादी साल 2014 में मिली’ और ‘कभी भारत के पहले प्रधानमंत्री सुभाष चंद्र बोस थे’ से चर्चाओं में रहने वाली कंगना रनौत और विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है। पहले उनके बयानांे पर मीम्स और चुटकुले तक बनते थे लेकिन किसान आंदोलन पर दिया गया उनका बयान सियासत में उबाल ले आया है। किसानों के द्वारा उनके खिलाफ देशभर में धरने-प्रदर्शन जारी हैं। कंगना का किसानों पर दिया गया बयान भाजपा को हरियाणा के आगामी चुनावों में सियासी नुकसान पहुंचा सकता है। पार्टी ने कंगना को न केवल नसीहत दी, बल्कि शीर्ष नेतृत्व
ने उन्हें तलब किया। फिलहाल भाजपा ने कंगना से किनारा कर लिया है

‘जैसा बांग्लादेश में हुआ, वैसा यहां भी (भारत) में भी होते देर नहीं लगती, अगर हमारा शीर्ष नेतृत्व इतना मजबूत नहीं होता। यहां पर जो किसान आंदोलन हुए, वहां पर लाशें लटकी थी, वहां पर रेप हो रहे थे। जब किसानों के हितकारी बिल वापस लिए गए थे, तब पूरा देश चौंक गया था। वो किसान आज भी वहां बैठे हुए हैं। उन्होंने कभी सोचा ही नहीं कि बिल वापस होगा। ये बड़ी लंबी प्लानिंग थी, जैसे बांग्लादेश में हुआ। इस तरह की षड्यंत्र के पीछे बहुत बड़ी ताकतें काम कर रही हैं।’

उक्त बयानों से हिमाचल प्रदेश में मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत ने किसान आंदोलन की आग को एक बार फिर सुलगा दिया है। अपने विवादास्पद बयानों को लेकर अक्सर चर्चाओं में रहने वाली कंगना एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई हैं। सांसद कंगना रनौत किसान आंदोलन पर बयान देकर फिलहाल मुसीबत में घिर गई हैं। जिसके चलते उन्हें आलोचना झेलनी पड़ रही है। विपक्ष हमलावर है। साथ ही पार्टी हाईकमान भी सख्त है। फिल्मों के क्षेत्र से राजनीति में कदम रखने के बाद पहली बार हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद बनी बॉलीवुड क्वीन कही जाने वाली कंगना का यह पहला मामला नहीं है जब वह विवादों के केंद्र में आई हैं, बल्कि इससे पहले वह ऐसे विवादों से लोगों के आक्रोश का कारण बन चुकी हैं। जिसके चलते उन पर आधा दर्जन से अधिक मुकदमें दर्ज हो चुके हैं।

जेपी नड्डा ने कंगना को किया तलब
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कंगना को तलब कर लिया है। साथ ही उन्हें आगे से ऐसा बयान ना देने की सख्त हिदायत दी है। पार्टी ने कंगना के बयान पर कहा है कि भाजपा कंगना के बयान से असहमति व्यक्त करती है। साथ ही यह कहा गया कि पार्टी की ओर से नीतिगत विषयों पर बोलने के लिए कंगना रनौत को न तो अनुमति है और न ही वे बयान देने के लिए अधिकृत हैं। भाजपा ने कहा है कि पार्टी की ओर से कंगना रनौत को निर्देशित किया गया है कि वे इस प्रकार के कोई बयान भविष्य में न दें। पार्टी की तरफ से कहा गया कि भारतीय जनता पार्टी ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ तथा ‘सामाजिक समरसता के सिद्धांतों पर चलने के लिए कृत संकल्पित है। पंजाब के भाजपा नेता हरजीत सिंह ग्रेवाल ने इसे कंगना का निजी बयान बताया है। उन्होंने कहा कि किसानों पर बोलना कंगना का डिपार्टमेंट नहीं है। यह उनका निजी बयान है। प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा किसान हितैषी हैं। कंगना को इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए। उन्हें ऐसे बयानों से दूरी बनानी चाहिए।

अपने किए पर पछता रही कंगना

कंगना रनौत को पार्टी की तरफ से फटकार मिलने के बाद वह अपने किए पर पछतावा कर रही हैं। कंगना ने स्वीकार किया है कि किसान आंदोलन पर उनके द्वारा दिए गए बयान को लेकर पार्टी नेतृत्व ने उन्हें फटकार लगाई है। साथ ही उन्होंने कहा कि भविष्य में वह शब्दों के चयन को लेकर ज्यादा सतर्क और सावधान रहेंगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मैंने जो बात कही थी, उसे सही से पेश नहीं किया गया और मेरा इरादा ऐसा बिल्कुल नहीं था।

‘फिल्मी स्क्रिप्ट पर नहीं चलती है राजनीति’

कांग्रेस पार्टी ने भी कंगना को किसान आंदोलन पर दिए गए विवादित बयान के मामले पर आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष संजय अवस्थी ने कहा है कि राजनीति की समझ आने में कंगना रनौत को अभी समय लगेगा। फिल्मों में अभी तक कंगना स्क्रिप्ट पढ़कर काम करती रही हैं, लेकिन राजनीति फिल्मी स्क्रिप्ट पर नहीं चलती है। मंडी से सांसद बनने के बाद अब कंगना संवैधानिक पद पर है। इसलिए कंगना को अब मुद्दों की गंभीरता को समझ कर बयानबाजी करनी चाहिए।

‘एनएसए के तहत भेजा जाए डिब्रूगढ़ जेल’
पंजाब के कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री राजकुमार वेरका ने कंगना रनौत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और एनएसए के तहत कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कंगना रनौत रोज पंजाब के नेताओं के खिलाफ जहर उगलती हैं। उन्होंने किसानों को खालिस्तानी कहा। देश के किसानों को गाली दी। वे किसी की शह पर बोल रही हैं। मैं मुख्यमंत्री भगवंत मान से मांग करता हूं कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत गिरफ्तार कर डिब्रूगढ़ जेल भेजा जाए। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि लोगों ने उन्हें मंडी के मुद्दों को हल करने के लिए सांसद के रूप में चुना, न कि बेतुके बयान देने के लिए। मैं भाजपा से कहना चाहूंगा कि वह अपने सांसदों को नियंत्रित करे। किसानों के विरोध के बारे में जिस तरह के बयान दिए जा रहे हैं, वे असहनीय हैं।

हरियाणा में हो सकती है हानी
यहां यह बताना जरूरी है कि आगामी अक्टूबर माह में होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनावों के मद्देनजर रनौत का बयान भाजपा के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा हरियाणा में 10 सीटों से गिरकर सिर्फ पांच पर आ गई है। जबकि कांग्रेस ने राज्य में अपना वोट शेयर 28 फीसदी से बढ़ाकर 43 फीसदी कर दिया है। ऐसे में भाजपा का सियासी गणित गड़बड़ा सकता है।

पूर्व में किसानों पर दिए विवादास्पद बयान
किसानों पर विवादास्पद टिप्पणी का कंगना का पुराना रिकॉर्ड रहा है। गौरतलब है कि कंगना रनौत को पद्मश्री मिल चुका है। लेकिन किसान नेताओं का कहना है कि उन्हें पद्मश्री जो मिला है वह किसान आंदोलन के खिलाफ उनकी नफरत के लिए नहीं है, जिन्हें उन्होंने बिना सबूत के ‘आतंकवादी’ और ‘खालिस्तानी’ कहा। पूर्व में किसान आंदोलन के दौरान कंगना रनौत ने एक ट्वीट को रिट्वीट किया था जिसमें किसान आंदोलन में शामिल हुई बुजुर्ग महिला को शाहीन बाग की बिलकिस बानो बताया गया था। उस ट्वीट में लिखा था कि दिहाड़ी के हिसाब से दादी से ये काम करवाया जाता है। कंगना को ये रिट्वीट करना भारी पड़ गया था। तब उनकी बहुत आलोचना हुई थी। तब उनके खिलाफ केस भी दर्ज करवाया गया था। कंगना ने रिट्वीट में लिखा था कि यह वही दादी हैं जिसे टाइम मैगजीन ने अपनी लिस्ट में मोस्ट पावरफुल इंडियन का दर्जा दिया था। जो कि 100 रुपए में उपलब्ध है।
आजादी वाले बयान पर बने मीम्स और चुटकुले दो साल पहले कंगना उस समय चर्चाओं में आई थी जब उनके आजादी वाले बयान पर खूब हो-हल्ला मचा था। उस समय कंगना ने एक साक्षात्कार में यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि भारत को ‘असली आजादी’ 2014 में उस समय मिली थी जब नरेंद्र मोदी सरकार सत्ता में आई। वहीं 1947 में देश को जो स्वतंत्रता मिली थी वह ‘भीख’ में मिली थी। कंगना के इस बयान के बाद देश में जमकर बवाल मचा था। सोशल मीडिया पर उन्हें खूब ट्रोल का सामना करना पड़ा था।

महात्मा गांधी को बताया था सत्ता का भूखा
कंगना यही पर नहीं रूकी थीं उन्होंने महात्मा गांधी के खिलाफ भी जहर उगला था और बापू को सत्ता का भूखा तथा चालाक बताया था। तब कंगना ने लिखा था कि स्वतंत्रता के लिए लड़ने वालों को उन लोगों ने अपने मालिकों को सौंप दिया, जिनमें अपने ऊपर अत्याचार करने वालों से लड़ने की ना तो हिम्मत थी ना ही खून में उबाल। ये सत्ता के भूखे और चालाक लोग थे। कंगना ने महात्मा गांधी की तरफ इशारा करते हुए कहा था कि ये वही थे जिन्होंने हमें सिखाया था कि अगर कोई तुम्हें एक गाल पर थप्पड़ मारे तो उसके आगे दूसरा गाल कर दो और इस तरह तुमको आजादी मिल जाएगी। इस तरह से आजादी नहीं सिर्फ भीख मिलती है। अपने हीरो समझदारी से चुनें।

ममता को कहा खून की प्यासी ताड़का
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की जीत के बाद तो कंगना रनौत ने ट्वीट कर ममता बनर्जी को खून की प्यासी ताड़का तक कह दिया था। जिसके बाद काफी शोर मचा था। उस दौरान कंगना ने अपने ट्वीट में लिखा था कि मैं गलत थी, वह रावण नहीं है, रावण तो महान राजा था। उसने तो दुनिया का सबसे अमीर देश बनाया था। मगर यह तो खून की प्यासी राक्षसी ताड़का है। कंगना के इस ट्वीट पर काफी विवाद छिड़ गया था। उन्हें खूब ट्रोल किया गया था। यही नहीं कंगना का ट्विटर अकाउंट भी बेन कर दिया गया था।

शबाना को बताया टुकड़े-टुकड़े गैंग की साथी
2019 में हुए पुलवामा हमले के बाद शबाना आजमी का पाकिस्तान में एक कार्यक्रम प्रस्तावित था। जिसको लेकर कंगना ने उन पर टिप्पणी की थी। कंगना ने शबाना आजमी पर निशाना साधते हुए कहा था कि शबाना आजमी जैसे लोग टुकड़े-टुकड़े गैंग के साथ खड़े होते हैं। जब उरी हमले के बाद पाकिस्तानी कलाकारों को बैन किया गया है तो इन्हें कराची में इवेंट करने की क्या जरूरत है। ये इंडस्ट्री देशद्रोहियों से भरी पड़ी है। कंगना ने उन्हें दुश्मनों की दोस्त तक कह दिया था। इसके बाद इस पर सियासी तीर चले। जिसके चलते शबाना और जावेद अख्तर को यह कार्यक्रम निरस्त करना पड़ा था।

ऋतिक को कहा ‘एक्स’
कंगना और ऋतिक रोशन के बीच का आपसी विवाद खूब सुर्खियां बटोर चुका है। फिल्म इंडस्ट्री में दोनों का मामला चर्चा का विषय बन गया। इस मामले में कई आरोप और कानूनी लड़ाई भी शामिल थी। दोनों के बीच फिल्म में ‘कृष 3’ की शूटिंग के दौरान डेटिंग की अफवाह थी। तब कंगना ने अपने रिश्ते का खुलकर दावा किया। जबकि दूसरी तरफ ऋतिक ने बार-बार उनके साथ ऐसे किसी भी संबंध से इनकार किया। नोबत यह आ गई थी कि एक-दूसरे के खिलाफ दोनों ने केस दर्ज करा दिए।

‘पंगा गर्ल’ पर दर्ज है आठ मुकदमे
अपने विवादों के चलते कंगना ‘पंगा गर्ल’ कही जाती हैं। अक्सर पंगे करते रहने की वजह से उन पर आठ मुकदमंे दर्ज हैं। जिनमंे पहला मुकदमा गीतकार जावेद अख्तर ने मानहानि का किया है, जो मुंबई के अंधेरी में दर्ज है। दूसरा केस आशीष कौल ने मुंबई के बांद्रा थाना में कॉपी राइट का दर्ज करवाया है। इसी तरह तीसरा मामला बांद्रा थाना में ही दर्ज है। चौथा मामला पंजाब के भटिंडा में महिला किसान महिंद्र कौर ने मानहानि का दर्ज कराया है। पांचवां केस जरीना वहाब ने दर्ज कराया है। छठा मामला आदित्य पंचोली ने दर्ज करवाया है। सातवां मामला कर्नाटक हाईकोर्ट में रमेश नायक ने दर्ज कराया है और आठवां मामला बॉम्बे हाईकोर्ट के तहत सत्र न्यायालय दिंडोशी में दर्ज है।

इमरजेंसी पर ‘आपातकाल’
कंगना का सबसे ताजा विवाद आने वाली फिल्म ‘इमरजेंसी’ को लेकर शुरू हुआ है, जिसमें कंगना ने पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी का किरदार निभाया है। फिलहाल विवाद के कारण इसकी रिलीज पर रोक लगा दी गई है। वह इस फिल्म के कारण पंजाब की बड़ी संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के निशाने पर आ गई हैं। कमेटी ने फिल्म निर्माता को कानूनी नोटिस भेजा है, जिसमें कंगना समेत फिल्म के निर्माता से सार्वजनिक और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जारी ट्रेलर को हटाने और सिख समुदाय से लिखित माफी मांगने को कहा गया है। फिल्म ‘इमरजेंसी’ पर आरोप यह है कि सिखों के इतिहास और चरित्र को गलत तरीके से पेश किया गया है। कमेटी की ओर से कानूनी सलाहकार अमनबीर सिंह स्याली ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की है। इस मामले पर चंडीगढ़ हाईकोर्ट में भी मोहाली के गुरिंदर सिंह और जगमोहन सिंह ने जनहित याचिका दायर की है।

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