समाप्त हुई राहुल की न्याय यात्रा
मणिुपर से 14 जनवरी के दिन शुरू हुई राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ 6700 किलोमीटर की दूरी तय कर 16 मार्च के दिन मुंबई में समाप्त हो गई। दादर स्थित बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के स्मृति स्थल ‘चैतन्य भूमि’ में इस यात्रा के समापन अवसर पर एक विशाल रैली का आयोजन किया गया जिसमें इंडिया गठबंधन के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा लगा। इस रैली में उमड़े विशाल जनसमूह ने मोदी मैजिक चलते अस्त-त्रस्त विपक्ष को ढ़ाढस बढ़ाने के साथ-साथ भाजपा नेतृत्व की चिंताओं में इजाफा करने का काम किया है। देश के 16 राज्यों के 110 जनपदों से गुजरी इस यात्रा को मुख्यट्टाारा के मीडिया ने भले ही नजरअंदाज कर माहौल बनाने का प्रयास किया कि यात्रा को जनसमर्थन नहीं मिल रहा है, जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। राहुल गांट्टाी के तेवरों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे आम चुनाव 2024 में सीट्टो प्रट्टाानमंत्री मोदी से दो हाथ करने के लिए तैयार हो चुके हैं।
प्रधानमंत्री मोदी पर सीट्टो प्रहार करते हुए राहुल ने कहा-‘राजा की आत्मा ईवीएम, सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स में है। इसी राज्य के एक वरिष्ठ नेता कांग्रेस छोड़ते हैं और मेरी मां से रोकर कहते हैं कि मुझे शर्म आ रही है कि इस शक्ति से लड़ने की हिम्मत नहीं है, मैं जेल नहीं जाना चाहता। ऐसे हजारों लोग डराए गए हैं। इसी के दम पर वो नेताओं को डराकर भाजपा में शामिल करा रहे हैं। कांग्रेस, शिवसेना, एनसीपी और एसपी के लोग यूं ही चले गए? वे सब डरकर बीजेपी में गए हैं। नरेंद्र मोदी मुखौटा है। जैसे बॉलीवुड के एक्टर-एक्ट्रेस हैं। उनसे कुछ करने को कहा जाता है, वैसे ही मोदी हैं। उनकी 56 इंच की छाती नहीं है, खोखला व्यक्ति है। मैं सिस्टम को अंदर से जानता हूं, इसलिए वो मुझसे डरते हैं। काफी बातचीत होती है कि हम बीजेपी से लड़ रहे हैं। लोग सोचते हैं कि हम एक राजनीतिक दल के खिलाफ लड़ रहे हैं। देश भी ये सोचता है कि मंच पर बैठे नेता एक राजनीतिक पार्टी से लड़ रहे हैं। ये सच नहीं है। हिंदुस्तान के युवाओं को ये समझना होगा कि ये सब लोग एक व्यक्ति के खिलाफ लड़ रहे हैं? हम न बीजेपी और न ही एक व्यक्ति के खिलाफ लड़ रहे हैं। एक व्यक्ति को चेहरा बनाकर ऊपर कर रखा है। हिंदू धर्म में एक शब्द शक्ति होता है। हम शक्ति से लड़ रहे हैं। यह एक ऐसी शक्ति है, जिसने आज भारत की आवाज को, भारत की संस्थाओं को, चुनाव आयोग को, मीडिया को, उद्योग जगत को अपने चंगुल में फंसा लिया है।
राहुल के इस बयान पर सियासत गरमा गई है। सत्ताधारी बीजेपी इस टिप्पणी को लेकर उन पर चौतरफा हमलावर हो चुकी है। यहां तक कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी पर जमकर हमला बोला है।
पीएम ने कर्नाटक की एक रैली में इस बयान को लेकर राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा, मुंबई में ईडी गठबंधन की तरफ से एक खुला ऐलान किया गया है। वे लोग हिंदू धर्म में समाहित शक्ति को समाप्त करना चाहते हैं। हिंदू समाज जिन्हें शक्ति मानता है, उस शक्ति के विनाश का उन्होंने ऐलान कर दिया है। अगर शक्ति विनाश का उनका ऐलान है तो शक्ति उपासना का मेरा भी ऐलान है। मैं इस शक्ति को समाप्त करने की घोषणा करने वाले इंडी गठबंधन की चुनौती स्वीकार करता हूं।’
राहुल गांधी ने दी सफाई
पीएम मोदी और भाजपा के हमले के बाद राहुल ने अपने बयान को लेकर सफाई दी है। उन्होंने पीएम मोदी पर उनके बयान को घुमा फिरा कर पेश करने का आरोप लगाया है। राहुल ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, ‘पीएम को मेरी बातें अच्छी नहीं लगतीं, वो किसी-न-किसी तरह से बातों को घुमाकर उनका हमेशा अर्थ बदलने की कोशिश करते हैं, क्योंकि वो जानते हैं कि मैंने एक सच्चाई बोली है। जिस शक्ति का मैंने जिक्र किया, जिस शक्ति से हम लड़ रहे हैं, उस शक्ति का मुखौटा पीएम हैं।’ वह एक ऐसी शक्ति हैं, जिसने आज भारत की आवाज को, भारत की संस्थाओं को, सीबीआई, आईटी, ईडी, चुनाव आयोग, मीडिया, भारत के उद्योग जगत और भारत के समूचे संवैधानिक ढांचे को ही अपने चंगुल में दबोच लिया है। उसी शक्ति के लिए पीएम भारत के बैंकों से हजारों करोड़ के कर्ज माफ कराते हैं, जबकि भारत का किसान कुछ हजार रुपयों का कर्ज न चुका पाने पर आत्महत्या कर लेता है। उसी शक्ति को भारत के बंदरगाह, भारत के हवाई अड्डे दिये जाते हैं जबकि भारत के युवाओं को अग्निवीर का तोहफा दिया जाता है जिससे उसकी हिम्मत टूट जाती है। इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए हिंदुस्तान में हफ्ता वसूली चल रही है। कोई भी कुछ बोलता है तो ईडी, सीबीआई, आईटी उन्हें डराने पहुंच जाती हैं। अडानी को रेलवे, सड़क, सुरक्षा और बिजली, इन सभी सेक्टर से पैसा मिलता है। अडानी का मतलब नरेंद्र मोदी ही है। दोनों एक ही हैं। आप इन्हें मोडानी भी कह सकते हैं।’’
इसके अलावा राहुल ने कहा कि पीएम मोदी बोलते थे कि उन्हें देश से भ्रष्टाचार मिटाना है। फिर उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड का पूरा ढांचा तैयार क्यों किया? हिंदुस्तान में कोरोना से करीब 50 लाख लोगों की जान गई। एक तरफ लोगों की जान जा रही थी, दूसरी तरफ वैक्सीन वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट नरेंद्र मोदी को पैसा दे रही थी।

उन्होंने आगे लिखा कि ‘उसी शक्ति को दिन रात सलामी ठोकते हुए देश की मीडिया सच्चाई को दबा देती है। उसी शक्ति के गुलाम नरेंद्र मोदी जी देश के गरीब पर जीएसटी थोपते हैं, महंगाई पर लगाम न लगाते हुए, उस शक्ति को बढ़ाने के लिए देश की संपत्ति को नीलाम करते हैं। उस शक्ति को मैं पहचानता हूं, उस शक्ति को नरेंद्र मोदी जी भी पहचानते हैं, वह किसी प्रकार की कोई धार्मिक शक्ति नहीं है, वह अधर्म, भ्रष्टाचार और असत्य की शक्ति है। इसलिए जब-जब मैं उसके खिलाफ आवाज उठाता हूं, मोदी जी और उनकी झूठों की मशीन बौखलाती है, भड़क जाती है।’
गौरतलब है कि 63 दिनों तक चलने वाली ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ ने देश के 16 राज्य और 110 जिलों के 337 विट्टाानसभा सीटों को कवर किया। इस दौरान राहुल गांधी ने बस से और पैदल 6 हजार 713 किलोमीटर से ज्यादा का सफर किया। यह मणिपुर से शुरू होकर नागालैंड, असम, मेघालय, पचिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात से होते हुए गत सप्ताह 16 मार्च को डॉ.बी.आर. आंबेडकर के स्मारक महाराष्ट्र में इसका समापन समारोह हुआ।
इससे पहले राहुल गांधी ने 7 सितंबर 2022 से 30 जनवरी 2023 तक ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की थी। 145 दिनों की यह यात्रा तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू होकर जम्मू-कमीर में खत्म हुई थी। तब राहुल ने 3 हजार 570 किलोमीटर की यात्रा में 12 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों को कवर किया था। श्रीनगर में यात्रा के समापन के मौके पर शेर-ए- कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में राहुल ने कहा था- ‘मैंने यह यात्रा अपने लिए या कांग्रेस के लिए नहीं बल्कि देश की जनता के लिए की है। हमारा उद्देय उस विचारधारा के खिलाफ खड़ा होना है जो इस देश की नींव को नष्ट करना चाहती है।’
न्याय यात्रा का प्रभाव
राहुल गांधी की दूसरी न्याय यात्रा की समाप्ति बाद पूछा जा रहा है कि क्या कांग्रेस और ‘इंडिया गठबंधन’ को इस यात्रा का राजनीतिक लाभ मिलेगा? गौरतलब है कि कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में मिली जीत का श्रेय राहुल की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को दिया था। ‘न्याय यात्रा’ की शुरुआत लोकसभा चुनाव से ठीक पहले की गई और जिस दिन चुनाव आयोग ने आम चुनाव की तारीखें घोषित की ठीक उसी दिन इस यात्रा का समापन हुआ है। राहुल ने अपनी इस यात्रा के दौरान लगातार जाति जनगणना, महिला सुरक्षा, दलितों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाया जरूर है और उन्हें अपार जनसमर्थन भी मिला लेकिन भाजपा ने इसकी धार को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के जरिए कुंद कर दिया है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही राहुल गांधी व्यक्तिगत तौर पर इस यात्रा के चलते अपनी छवि एक गंभीर और संवेदनशील नेता की स्थापित कर पाने में सफल रहे हैं, कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन को चुनावी जंग में इस यात्रा का खास फायदा मिलता नजर नहीं आ रहा है।

