साल के अंत में प्रस्तावित मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने हाल ही में 39 नामों के साथ चुनाव के लिए उम्मीदवारों की अपनी दूसरी सूची जारी की है। इसमें कई केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को मैदान में उतारा गया है, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भविष्य को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि जिस प्रकार भाजपा ने केंद्रीय मंत्रियों तक को मैदान में उतार दिया है उससे क्या शिवराज का राजनीतिक भविष्य खतरे में पड़ सकता है। इस सूची में 3 केंद्रीय मंत्रियों, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते, के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का नाम शामिल है। पटेल पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे, फग्गन सिंह 33 साल बाद विधानसभा चुनाव लड़ेंगे और तोमर 15 साल बाद दिमनी विधानसभा सीट से मैदान में उतरेंगे। जबलपुर से सांसद राकेश सिंह और सीधी से सांसद रीति पाठक भी पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं और सूची में उनका भी नाम है। केंद्रीय मंत्री तोमर को राज्य चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक भी बनाया गया है। ये पहली बार है जब भाजपा ने राज्य चुनाव संयोजक को भी उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा भाजपा ने विजयवर्गीय को इंदौर-1 सीट से उम्मीदवार बनाया है, जहां से वह अपने बेटे को टिकट दिलाने की कोशिश में जुटे थे। अपने राजनीतिक कद की वजह से विजयवर्गीय पिछले चुनावों में मुख्यमंत्री पद के दावेदार भी रहे हैं। भाजपा को मध्य प्रदेश चुनाव में केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को उतारने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी, इसका पहला कारण बताया जा रहा है कि पार्टी भाई-भतीजावाद पर अंकुश लगाकर अधिक से अधिक सीटें जीतना चाहती है। दूसरा कारण यह है कि केंद्रीय मंत्रियों को उन सीटों पर उतारा गया है, जहां से पार्टी को पिछले चुनाव में हार मिली थी। तीसरा कारण ये है कि पार्टी राज्य के वरिष्ठ नेताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों ने कुछ अलग अनुमान लगाए हैं। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश में भाजपा सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है और उसे राज्य में क्षेत्रीय नेताओं की गुटबाजी को भी थामना था, इसलिए ऐसा किया गया है। उनका मानना है कि भाजपा में संगठन ही किसी नेता या कार्यकर्ता की जिम्मेदारी तय करता है और संगठन के इस कदम से लग रहा है कि वह मौजूदा मुख्यमंत्री शिवराज पर नकेल कसना चाहता है। जानकारों के मुताबिक शिवराज भाजपा के शीर्ष नेतृत्व यानी पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की पहली पसंद नहीं रहे हैं। शिवराज को झेलना भाजपा की मजबूरी रही है और 2018 में सत्ता गंवा देने के बाद 2020 में उन्हें तत्काल परिस्थितियों में कोई विकल्प न होने के कारण ही मुख्यमंत्री बनाया गया था। ऐसे में अब जब भाजपा ने शिवराज के विकल्पों को मैदान में उतारा है तो इससे शिवराज का राजनीतिक भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

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