बिहार के मुख्यमंत्री इन दिनों खासे परेशान चल रहे हैं। उन्होंने गांधी जी की प्रेरणा से राज्य में संपूर्ण शराबबंदी कर वाहवाही लूटने का प्रयास किया था। उनका दांव लेकिन अब पलटवार कर रहा है। राज्य में नशाबंदी तो हो नहीं पाई, पुलिस की भ्रष्ट कमाई जरूर रिकॉर्ड तोड़ हो रही है। राज्य के नशाबंदी कानून का असर गरीब तबके पर जमकर पड़ा है। लाखों की तादाद में इस तबके के लोग शराब पीने के चलते राज्य की जेलों में बंद है। न्यायालयों में लगभग साढ़े तीन लाख मामले इस कानून के चलते लंबित पड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तक ने इस पर अपनी चिंता व्यक्त कर डाली है। राजनीतिक स्तर पर भी हालात नीतीश बाबू के खिलाफ जाते स्पष्ट नजर आने लगे हैं। सरकार में अब उनका दबदबा पहले समान नहीं रहा है। भाजपा हर मामले में नीतीश कुमार के कदम रोकने का प्रयास कर रही है। विधानसभा में जद(यू) के सदस्यों की संख्या भाजपा और राजद के मुकाबले बेहद कम रह गई है। इसलिए न चाहते हुए भी नीतीश कुमार को भाजपा के इशारों पर नाचना पड़ रहा है। एनडीए के घटक दल अलग राग छेड़ नीतीश की परेशानियों का इजाफा कर रहे हैं। कुछ अर्सा पहले हिन्दुस्तान अवाम पार्टी के नेता और पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने ब्राह्मणों के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी कर डाली। भाजपा नेताओं ने मांझी को खरी-खोरी सुनाई तो वे भड़क कर गठबंधन तोड़ने की बात करने लगे। पटना के राजनीतिक गलियारों में खबर गर्म है कि नीतीश ने इस सबसे राहत पाने के लिए वरिष्ठ भाजपा नेता और अपने पुराने मित्र सुशील मोदी से गुहार लगाई है। लंबे अर्से से राज्य की राजनीति से दूर मोदी अब दोबारा से सक्रिय हो नीतीश की परेशानियों को थामने का प्रयास करते नजर आ रहे हैं। सुशील मोदी ने राज्य भाजपा नेताओं से संपर्क कर व्यर्थ में नीतीश को परेशान न करने की सलाह दी है।
भाजपा-जदयू में बढ़ रहा है तनाव

