गाय औेर गंगा पर मुखिया जी अभासी दुनिया के तीरंदाजां से परेशान चल रहे हैं। हिलटॉप पर पहले ही उनका आभासी दुनिया में बायानां और टिप्पणियों से स्वागत हो चुका है, जबकि मुखिया जी की दलील है कि सारा पाप तो पिछली सरकार द्वारा किया गया था। लेकिन सारा ठीकरा उनके सिर फोड़ा गया। हिलटॉप पर गुफाओं से लेकर वातानूकूलित मठों में रहने वाले मठाधीशों ने भी अपने बयानां से पहले ही मुखिया जी को हकलकान किया। हालांकि अब आभासी दुनिया में हिलटॉप का नाम नहीं दिख रहा है। लेकिन मुखिया जी की छवि को जितना नुकसान होना था, वह तो हो चुका। अब गाय पर ज्ञान को लेकर मुखिया जी पर फिर से आभासी दुनिया के जबर्दस्त तीर छोड़े जा रहे हैं। उनको गाय के गौमूत्र और ऑक्सीजन के बयान के बाद पशु वैज्ञानिक का पुरस्कार दिए जाने की मांग होने लगी है। हालांकि मुखिया जी यह जानते हैं कि जिस तरह से हिलटॉप शांत हो गया उसी तरह से यह भी सब शांत हो जाएगा, लेकिन इन सब के पीछे उनका दर्द यह है कि अब आभासी दुनिया में भी उनके विरोधियों ने एक ऐसा वर्ग बना लिया है जो उनके बयानां पर गहरी नजर रख रहा है। जरा-सा कुछ इधर-उधर हुआ नहीं कि उन पर एक साथ सैकड़ों तीर बरसाए जाने लगते हैं। दरबारी का कहना है कि अब जल्द ही आभासी दुनिया के तीरंदाजों पर सरकार की गहरी नजर रखने के लिए तैयारी है। इसके लिए कोई टिट फॉर टैट का फॉर्मूला अपनाए जाने की चर्चा हो रही है। यानी मीडिया के बंटे वर्ग की ही तरह से आभासी दुनिया को भी वर्ग में बांटा जाए। वैसे चर्चा तो यह भी है कि अर्बन नक्सलाइट के नाम पर पहले ही आभासी दुनिया पर निगाहें रखी जा रही हैं।
आभासी दुनिया के तीरों से असहज

