आम चुनाव के नतीजे आए लगभग दो महीने होने जा रहे हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में भाजपा को उम्मीदों के मुताबिक सीटें नहीं मिली। जिसकी समीक्षा प्रदेश से लेकर पार्टी हाईकमान तक की जा रही है। जिस वजह से पार्टी भीतर कलह खुलकर सामने आने लगी है। जिसने न सिर्फ भाजपा बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की चिंता बढ़ा दी है। संघ का मानना है कि अगर ऐसा ही रहा तो इसके उनकी कई वर्षों की मेहनत पर पानी फिर सकता है। यही नहीं इससे संघ के हिंदुत्व के एजेंडे को भी नुकसान होगा। ऐसे में संघ इस शीत युद्ध को शांत करने की तैयारी में है। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में बीजेपी के कई नेताओं ने पार्टी की नीतियों को लेकर सवाल उठाए हैं। यहां तक कि पार्टी के अंदर अब अहम की लड़ाई भी देखी जा रही है। जिसके बाद माना जा रहा है कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। वहीं आरएसएस ने भले ही पूरे विवाद पर सीधे तौर पर दखल नहीं दिया है लेकिन हालात पर नजर बना रखी है। चर्चा है कि जल्द ही संघ की ओर से मामले को शांत करने की कोशिश की जाएगी। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि संघ को लगता है कि बीजेपी में जिस तरह कलह दिखाई दे रही है, संगठन और सरकार में अहम की लड़ाई हो रही है उसका असर पार्टी पर पड़ सकता है। जिससे देश के सबसे बड़े सूबे में बीजेपी की पकड़ कमजोर न हो जाए इसलिए समय रहते इन झगड़ों और आपसी विवादों को खत्म करना जरूरी हो गया है। नहीं तो प्रदेश भाजपा के हाथ से निकल सकता है। आरएसएस के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात ये भी है कि यूपी में न सिर्फ बीजेपी की सीटें कम हुईं बल्कि जिस तरह से अयोध्या नगरी में राम मंदिर का निर्माण हुआ, कई विकास कार्य कराए गए, बीजेपी ने इसे विकास की प्रयोगशाला के तौर पर पेश किया वहां भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। काशी विश्वनाथ धाम की नगरी जहां से खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव मैदान में थे, वहां भी पार्टी का ग्राफ गिरा वो किसी बड़े झटके से कम नहीं है। ऐसी स्थिति न तो भाजपा और न ही संघ के लिए अच्छी होगी। इससे संघ की हिंदुत्व और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने की मुहिम भी प्रभावित होगी। ऐसे में संघ ने इस शीत युद्ध को शांत करने की तैयारी कर ली है।
शीत युद्ध को शांत करेगा संघ!

