जमीन की उर्वरा शक्ति समाप्त और जल स्रोतों का जलस्तर घटाने वाले यूकलिप्टस यानी नीलगिरी के पौधे को जंगलों से हटाने का काम किया जा रहा है, अब यूकलिप्टस की जगह गोरा नीम यानी मिलिया डूबिया का रोपण किया जाएगा, इस समय मिलिया की कई प्रजातियों पर रिसर्च भी चल रही है, और हल्द्वानी वन अनुसंधान केंद्र ने चार जगहों पर मिलिया डूबिया का रोपण भी किया है, जिसके अच्छे परिणाम भी सामने आ रहे हैं, वन अनुसंधान केंद्र के अधिकारियों के मुताबिक यदि आने वाले समय में मिलिया पर हो रहे शोध के अच्छे रिजल्ट सामने आए तो किसान अपने खेतों के आसपास इसका पौधारोपण कर सकते हैं जिससे खेतों की उर्वरा शक्ति बेहतर हो पाएगी। यूकलिप्टस उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर जंगलों और कृषि क्षेत्र के आसपास उपलब्ध है, माना जाता है की यूकलिप्टस जल स्रोतों के जल स्तर को काफी तेजी से घटा रहा है साथ ही इसकी पत्तियों में एसिड होता है जो जमीन पर गिरकर खेती की उर्वरा शक्ति को कम कर देती है, लिहाजा एक बड़े पैमाने पर कृषि क्षेत्र प्रभावित हो रहा है लेकिन अब हल्द्वानी वन अनुसंधान केंद्र यूकलिप्टस और पॉपुलर के पेड़ों को हटाकर गोरा नीम यानी मिलिया डुबिया के पौधों का रोपण करने पर विचार कर रहा है, जिसको देखते हुए मिलिया डुबिया पर शोध भी चल रहा है, और वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी ने तराई क्षेत्रो में पंतनगर, लालकुआं, पीपल पड़ाव और टांडा के कुछ इलाकों में इसका रोपण भी किया है, साथ ही साथ मिलिया पर शोध कार्य भी चल रहा है, जिसके आने वाले दिनों में अच्छे परिणाम आने की संभावना है। यूकलिप्टस एक ऐसी प्रजाति है जिसके पेड़ के नीचे कोई दूसरी वनस्पति नहीं उग पाती, साथ ही जिस खेत में यूके लिप्टस के पत्ते गिरते हैं वह भी मिट्टी में मिलकर खेत की उर्वरा शक्ति को भी कम कर देते हैं, लिहाजा यूके लिप्टस और पॉपुलर के ऑप्शन के तौर पर मिलिया डूबिया को चुना गया है, और इसके 10 क्लोन को भारत सरकार ने लगाने की अनुमति भी दे दी है, हालांकि अभी उत्तराखंड में मिलिया डूबिया कम पैमाने पर रोपित किया गया है लेकिन पंजाब, हरियाणा में इसकी बहुत अच्छे परिणाम सामने आए हैं, बड़ी दूसरी बात यह है की यूके लिप्टस और पॉपुलर का प्रयोग प्लाईवुड को बनाने में होता रहा है ठीक मिलिया डुबिया का प्रयोग भी उसी तरह प्लाईवुड और अन्य घरेलू सामानों को बनाने में आसानी से हो जाएगा, वन अनुसंधान केंद्र के रेंजर के मुताबिक यूकलिप्टस जहां भी बड़े पैमाने पर उपलब्ध है वहां किसी दूसरी प्रजाति के पौधों के नाम आने की वजह से इकोलॉजिकल सिस्टम गड़बड़ हो रहा है, क्योंकि यूकलिप्टस और पॉपुलर कि पौधों से वन्यजीवों को खाने के लिए कुछ भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है लेकिन मिलिया डुबिया का पौधा वन्यजीवों के भोजन के लिए बड़ा मददगार भी साबित हो सकता है। उत्तराखंड प्रदेश में यूकलिप्टस और पॉपुलर की वजह से अन्य वनस्पतियों को भारी नुकसान हो रहा है, जिससे पारिस्थिकी तंत्र गड़बड़ा रहा है, इसलिए बड़े पैमाने पर अब यूकलिप्टस को हटाने का काम जारी है और मिलिया डूबिया को जंगलो में रोपित कर शोध भी किया जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में एग्रो फॉरेस्ट्री के लिहाज से बेहतर परिणाम आने की उम्मीद है।
उत्तराखण्ड के जंगलो से हटेगा यूकलिप्टस…