उत्तर प्रदेश की राय बरेली सीट पर वरुण गांधी को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थी। चर्चा थी कि पीलीभीत से वरुण गांधी का टिकट कटने के बाद उन्हें भाजपा रायबरेली से चुनाव मैदान में उतारने की योजना बना रही है। लेकिन अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वरुण गांधी ने पार्टी का यह ऑफर ठुकरा दिया है। वरुण के इस फैसले के बाद राजनीतिक पंडितों का कहना है कि गांधी बनाम गांधी के संघर्ष से वरुण दूर रहना चाहते थे। भाजपा की नजर अमेठी के बाद रायबरेली सीट पर है। यहां तक कि बीजेपी कई सर्वे भी करवा चुकी है कि रायबरेली में कौन उम्मीदवार गांधी परिवार को कड़ी टक्कर दे सकता है। इससे पहले अमेठी सीट पिछली बार भाजपा ने राहुल गांधी से छीन ली थी। रायबरेली में समाजवादी पार्टी से मनोज पांडे और कांग्रेस से अदिति सिंह जैसे दिग्गज नेताओं को पार्टी पहले ही अपने खेमे में कर चुकी है। पिछले कुछ चुनावों से लगातार वहां कांग्रेस का जनाधार भी घटा है, जिससे बीजेपी के हौसले बुलंद हुए हैं। असल में बीजेपी ने अभी तक रायबरेली से उम्मीदवार घोषित नहीं किया था और इसी वजह से यह कयास लगाए जा रहे थे कि वह अमेठी की तरह इस बार रायबरेली में भी कांग्रेस का गेम आसान नहीं रहने देना चाहती। इससे पहले बीजेपी ने वरुण की पीलीभीत सीट से जितिन प्रसाद को टिकट दिया, जहां पहले ही चरण में चुनाव करवाए भी जा चुके हैं। टिकट कटने के बाद वरुण ने पीलीभीत के लोगों को एक भावनात्मक खत लिखा था और वहां के बेटे की तरह उससे जुड़े रहने का वादा किया था। वरुण के इस फैसले के बाद अब पार्टी ने रायबरेली सीट से दिनेश प्रताप सिंह को टिकट दिया है। दिनेश योगी सरकार में मंत्री हैं और कभी गांधी परिवार के करीबी रहे हैं।
वरुण ने ठुकराया पार्टी का प्रपोजल

