Uttarakhand

आम पार्टी से दिग्गजों के दांत हुए खट्टे

कभी आपने देखा है कि आम खाए कोई और दांत खट्टे हो किसी और के। लेकिन ऐसा हुआ है देहरादून में जहां पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का हरिद्वार के सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत की आम पार्टी में शामिल होना कुछ कांग्रेसी नेता पचा नहीं पा रहे हैं। हालांकि हरीश रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत की जुगलबंदी कोई नई नहीं है। जब त्रिवेंद्र सिंह मुख्यमंत्री थे, तब हरीश रावत की आम, काफल और माल्टा पार्टी में तत्कालीन मुख्यमंत्री को भी निमंत्रण दिया जाता था। त्रिवेंद्र भी हरीश की इन दावतों में शामिल होते थे। तब दोनों रावतों की ये दावतें सियासी सुर्खियां बंटोरती थीं। एक बार फिर से दोनों की यह आम पार्टी चर्चाओं के केंद्र में है। इसके बहाने कांग्रेस में एक बार फिर गुटबाजी और बयानबाजी का माहौल व्याप्त है

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से लगातार हार का मुंह देखने वाली कांग्र्रेस पार्टी को एक दशक बाद विधानसभा उपचुनाव में दोनों सीटों पर जीत मिलने से जहां पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह देखने को मिल रहा है तो वहीं पार्टी के बड़े नेताओं में अपना कद बढ़ाने की होड़-सी मची नजर आ रही है। इसका असर लोकसभा चुनाव में मिली हार के कारणों को जानने के लिए गठित कांग्रेस की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की बैठक में भी देखने को मिला। जहां कांग्रेस नेताओं ने एक-दूसरे पर अपनी भड़ास जमकर निकाली।

केंद्र में लगातार तीसरी बार मोदी सरकार बनने के बाद से ही उत्तराखण्ड में कांग्रेस तेजी से रसातल की ओर बढ़ी है। चुनावों में लगातार मिल रही हार के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्पित नेताओं में हताशा-निराशा का माहौल देखने को मिल रहा है। साथ ही पार्टी के जिन नेताओं को दिग्गज कहा जाता है उनके चुनाव लड़ने से पीछे हटने पर भी पार्टी भीतर खासी नाराजगी देखी जा रही है। लगातार मिल रही हार के बाद कांग्रेस भीतर घमासान तेज हुआ है और दिग्गज नेताओं को रिटायर करने की मांग भी उठने लगी है। साथ ही प्रदेश संगठन में भी आमूलचूल परिवर्तन किए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है।

इस सबके बीच कांग्रेस हाईकमान द्वारा उत्तराखण्ड में लोकसभा चुनाव में हार के कारणांे की समीक्षा के लिए दो सदस्य फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया जिसमें पूर्व सांसद पीएल पुनिया और सांसद रजनी पाटिल को सदस्य बनाया गया। हालांकि केवल पीएल पुनिया ही देहरादून पहंुचे और कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी नेताओं और पांचांे उम्मीदवारों के साथ बैठक ली। इस बैठक में हार के कारणों को जानने के लिए चर्चा हुई।

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेताओं ने हार के चार बड़े कारण बताए। जिसमें एक है दिग्गज नेताओं का चुनाव से पीछे हटना, दूसरा उम्मीवारों के चयन में देरी। तीसरा पार्टी के पुराने चेहरों पर ही दांव लगाना। एक कारण यह भी निकल कर सामने आया है कि जिस तरह से विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस मजबूती के साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरी थी ठीक इसके विपरीत लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की लचर रणनीति रही जिसके कारण मतदाताओं में विपरीत प्रभाव पड़ा।

अब फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदसय पीएल पुनिया लौट चुके हैं और हार के कारणों की समीक्षा रिपोर्ट कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंपेंगे लेकिन पुनिया के वापस लौटने के साथ ही कांग्रेस नेताओं में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ एक बार फिर से शुरू हो चुकी है। बैठक के बाद रात को पीएल पुनिया से मिलने उनके होटल में हरीश रावत, यशपाल आर्य और प्रीतम सिंह पहुंचे जिससे कांग्रेस के भीतर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। माना जा रहा हैे कि तीनों नेताओं के चुनाव न लड़ने के बाद उनके खिलाफ पार्टी में भारी नाराजगी के माहौल को देखते हुए ये तीनांे नेता अपना पक्ष रखने पुनिया से मिले। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि तीनों ही नेता प्रदेश संगठन की कार्यशैली से नाराज बताए जा रहे हैं जिसको लेकर पुनिया से गुपचुप मुलाकात करके प्रदेश संगठन की शिकायतें की गई हैं।

हालांकि इस बात का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है कि पुनिया के साथ तीनों नेताओं की मुलाकात में क्या-क्या बातें हुई। पुनिया ने भी मीडिया से इस मुलाकात के सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया लेकिन इससे एक बात तो साफ हो गई है कि प्रदेश कांग्रेस भीतर बहुत कुछ ठीक नहीं है और एक दशक के बाद मिली उपचुनाव में जीत भी पार्टी भीतर बड़ा घमासान मचा हुआ है। उपचुनाव में जीत का सेहरा अपने-अपने सिर बांधने के लिए हर कोई अपने आप को बड़ा साबित करने की होड़ में जुट गया है।

इस बीच राज्य की दो विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में मिली जीत ने मृतप्राय कांग्रेस में जान फूंकने का काम किया है। विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस को बदरीनाथ सीट पर भारी अंतर से जीत हासिल हुई और मंगलौर सीट पर महज 422 मतों से पार्टी को जीत मिली। इन दोनों ही सीटों पर मिली जीत कांग्रेस के लिए संजीवनी कही जा रही है।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो कांग्रेस के लिए लंबे समय बाद मिली यह जीत बड़े मायने रखती है। इस जीत से प्रदेश के इतिहास में पहली बार सत्ता पक्ष को उपचुनाव में हार मिली है जिससे कांग्रेस का मतदाताओं में अच्छा प्रभाव पड़ सकता है। कहा जा रहा है कि अगर भविष्य में कांग्रेस के बड़े नेता अपनी व्यक्तिगत राजनीति को छोड़ एकजुटता के साथ चुनाव लड़ते रहे तो 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सत्ता में वापसी हो सकती है। अब कांग्रेस केदारनाथ उपचुनाव में भी इसी तरह की एकजुटता दिखाएगी तो वह जीत की दहलीज पर पहुंच सकती है।

लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है और उपचुनाव मंे मिली जीत का श्रेय लेने की होड़ सी मची हुई है। प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा ने इस होड़ को आगे बढ़ाते हुए एक निजी चैनल को बयान दिया कि लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी प्रदेश संगठन और अध्यक्ष के ऊपर डाली जा रही है तो उपचुनाव में जीत का श्रेय भी उनको ही मिलना चाहिए। जबकि दूसरी तरफ बदरीनाथ सीट पर जीत के लिए कई नेता गणेश गोदियाल को श्रेय दिए जाने के पक्ष में हैं। यही नहीं बल्कि गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की भी मांग तेज होने लगी है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी उपचुनाव में कहीं न कहीं अपने को जीत का श्रेय देने की होड़ में नजर आ रहे हैं। हरीश रावत के खिलाफ कांग्रेस के कई नेता अब खुलकर बोलने लगे हैं। उपचुनाव में मिली जीत के जश्न के बीच एक विवाद भी कांग्रेस भीतर मची रार को सामने ला रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार से नव निर्वाचित सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने डिफेंस कॉलोनी स्थित आवास में आम पार्टी का आयोजन किया। इस पार्टी में कई नेताओं को आमंत्रित किया गया जिसमें हरीश रावत भी थे। हरीश रावत पार्टी में गए जिसके चित्र सोशल मीडिया में खूब वायरल हुए। पूर्व में इस तरह की फलों की पार्टी हरीश रावत करते रहे हैं। उनकी काफल पार्टी, माल्टा और आम के साथ- साथ पहाड़ी खान-पान की पार्टी उनके द्वारा आम पार्टी का आयोजन किया गया था जिसमें मुख्यमंत्री रहते त्रिवेंद्र रावत भी शामिल हुए थे।

त्रिवेंद्र सिंह रावत की आम पार्टी में हरीश रावत के शामिल होने से कांग्रेस के दो नेताओं ने उन पर आरोपों की बैछार करते हुए उनके इस कदम को कार्यकर्ताओं में हताशा पैदा करने वाला बताया। पूर्व में हरीश रावत के सबसे खास रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणजीत रावत ने तो तंज कसते हुए कहा कि यह आम पार्टी नहीं खास है। इस तरह से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है। कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने भी इस आम पार्टी को लेकर हरीश रावत पर तंज कसते हुए कहा कि प्रभारी देवेंद्र यादव के समय कांग्रेस पार्टी भाजपा सरकार के घोटालांे और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सरकार को घेर रही थी तब भी हरीश रावत भाजपा सरकार के मुखिया की तारीफ करते थे। इससे पार्टी का संघर्ष बेकार चला जाता था। अपनी पीड़ा को व्यक्त करते हुए हरक सिंह रावत यहां तक कह गए कि मेरे ऊपर सीबीआई और ईडी इनके ही द्वारा छोड़ी गई है। इस पर हरीश रावत ने कह डाला कि ‘आम मैंने खाया और बीमार कुछ मुंह पके हुए लोग हो गए।’ साथ ही यह भी कहा कि ‘मैंने तो दिन के उजाले में आम खाया लेकिन रात के अंधेरे में मैं अपना और अपने करीबियों का क्रेशर बचाने मुख्यमंत्री से मिलने नहीं गया था।’ इस मामले से यह तो साफ हो गया है कि कांग्रेस के भीतर अब आपसी लड़ाई खुलकर सामने आने लगी है।

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