गत् सप्ताह महज पांच दिनों के भीतर तीन महिलाओं की दुर्दांत हत्याओं से पूरा देहरादून जिला दहल उठा है। 29 जनवरी को विकास नगर में एक छात्रा की दरांती से हत्या करने का मामला सामने आया तो वहीं 31 जनवरी को ऋषिकेश के शिवाजी नगर स्थिति एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई। 2 फरवरी को देहरादून के अति व्यस्तम मच्छी बाजार के दुल्हा बाजार में एक 23 वर्षीय बालिका की धारदार हथियार से दिन-दहाड़े हत्या कर दी गई। हालांकि इन वारदातों में शामिल दो अभियुक्तों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है लेकिन विकास नगर हत्याकांड का आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर बताया जा रहा है। इन वारदातों में प्रदेश की कानून व्यवस्था और खास तौर पर दून पुलिस की कार्यशैली पर गम्भीर सवाल खड़े हो रहे हैं तो वहीं प्रदेश में सरकार के अपराध मुक्त दावे की पोल भी खुल गई है
उत्तराखण्ड में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर लम्बे अर्से से ही सवाल खड़े होते रहे हैं। कांग्रेस इस मामले को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा कर चुकी है। गत् सप्ताह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सचिवालय में राज्य की कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठक के दौरान पुलिस को अपनी कार्यशैली सुधारने का निर्देश देते हुए आम आदमी को न सताए जाने की भी बात कही थी। जब मुख्यमंत्री कानून व्यवस्था की समीक्षा कर रहे थे उसी समय देहरादून के मच्छी बाजार के दुल्हा बाजार में दिन दहाड़े एक बालिका की नृशंस हत्या कर दी गई।
इसके दो दिन पूर्व 29 जनवरी को विकासनगर कोतवाली क्षेत्र के ढालीपुर गांव में 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली 18 वर्षीय छात्रा मनीषा का शव झाड़ियों में पाया गया। घटनास्थल पर एक धारदार हथियार दरांती भी पाई गई। पुलिस के अनुसार इसी दरांती से कई हमला करके मनीषा की हत्या की गई। मामले की शुरुआती जांच में सामने आया कि मृतक का चचेरा भाई आरोपी सुरेंद्र कुछ दिनों से नई दरांती लेकर घूम रहा था। सुरेंद्र घटना के दिन मनीषा को अस्पताल लेकर गया लेकिन शाम होने के बावजूद दोनों वापस नहीं आए। इस पर खोजबीन की गई तो मामला सामने आया। सुरेंद्र गायब है और पुलिस उसकी खोजबीन कर रही है।
31 जनवरी को ऋषिकेश के शिवाजी में 32 वर्षीय प्रीति रावत की हत्या उसके ही पूर्व पे्रमी सुरेश गुप्ता द्वारा रात गोली मार कर कर दी गई। प्रीति रावत एम्स ऋषिकेश में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्य करती थी। पुलिस के अनुसार आरोपी सुरेश गुप्ता और प्रीति के बीच पूर्व में सम्बंध रहे हैं जो कि बाद में बिगड़ गए। सुरेश प्रीति पर विवाह का दवाब बना रहा था जिसे प्रीति ने ठुकरा दिया। इससे नाराज होकर सुरेश गुप्ता ने रात को प्रीति के आवास पर पहुंच कर जाली के दरवाजे से ही सटाकर गोली मार दी जिससे प्रीति की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। पुलिस ने सुरेश गुप्ता को सहारनपुर जिले के छुटमलपुर से गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।
2 फरवरी को देहरादून के व्यस्तम मच्छी बाजार के दुल्हा बाजार में आकाश कुमार ने एक दुकान पर काम करने वाली 23 वर्षीय गुंजन को धारदार हथियार चापड़ से कई वार करके मौत के घाट उतार दिया। खास बात यह है कि बाजार में भीड़ होने के बावजूद हत्यारा आसानी से निकल गया लेकिन किसी ने भी हत्यारे को नहीं रोका। बताया जाता है कि हत्यारा आराम से हत्या करके चापड़ हाथ में लहराता हुआ आसानी से भाग गया। पुलिस ने आकाश कुमार को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।
जानकारी के अनुसार आकाश शादीशुदा और एक बच्चे का बाप है। उसका गुजंन से पूर्व में अच्छे प्रेम सम्बंध थे लेकिन गुंजन को जब से पता चला कि आकाश शादीशुदा है तो उसने उससे सम्बंध तोड़ लिए। लेकिन आकाश उसको निरंतर परेशान करता रहा और गुंजन से शादी करने का दबाव बनाता रहा। इस मामले में एक बात यह भी सामने आई कि आकाश की पत्नी ने गुंजन को बताया कि आकाश चापड़ लेकर घूम रहा है और गुंजन को जान से मारने की बात कह रहा था। इसके बाद गुंजन और उसके परिजनों ने 31 जनवरी को देहरादून कोतवाली क्षेत्र की खुड़बुड़ा चौकी में आकाश के खिलाफ जान का खतरा बताते हुए शिकायत भी दर्ज करवाई लेकिन पुलिस ने इस शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं की। पुलिस में शिकायत करने से आकाश और भी क्रोधित हो गया। दो फरवरी को सुबह करीब दस बजे गुंजन अपनी स्कूटी से दुकान पर पहुंची। आकाश ने अपने स्कूटर से चापड़ निकालकर गुंजन की गर्दन पर कई वार किए। गुंजन ने अपने आप को बचाने का भरपूर प्रयास किया और मदद की गुहार भी लगाई लेकिन गर्दन पर घातक वार के चलते गुंजन वहीं गिर गई। बुरी तरह घायल गुंजन को दून अस्पताल लाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पांच दिनों में जिले में लगातार तीन महिलाओं की नृशंस हत्याओं से कानून व्यवस्था पर गम्भीर सवाल खड़े होने लगे। इसकी आंच मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री स्तर से डीजीपी को कानून व्यवस्था दुरुस्त रखने की बाबत निर्देश जारी होते ही डीजीपी भी कड़े एक्शन में दिखाई दिए और देहरादून जिले में एक के बाद एक हत्याओं के कारण लापरवाही बरतने वाले पुलिस दरोगाओं को निलम्बित कर दिया गया है। राज्य की कानून व्यवस्था के इतिहास में गुंजन हत्याकांड पुलिस व्यवस्था को सुधारने के लिए भी जाना जा सकता है। महज चार दिनों में पुलिस द्वारा चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है। यह उत्तराखण्ड पुलिस के नाम एक रिकॉर्ड माना जा सकता है। चार्जशीट में 35 गवाहों को शामिल किया गया। मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानते हुए एसएसपी देहरादून ने तत्काल इस मामले में एसपी सिटी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी ने दिन रात काम करते हुए घटना स्थल और आस-पास के क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों की जांच और घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम द्वारा वैज्ञानिक तरीके से सबूत एकत्र किए। आरोपी आकाश के स्कूटर और हत्या में प्रयोग चापड़ के साथ-साथ उसके कपड़े जूते और हेलमेंट को भी विधि विज्ञानशाला में भेजा। गवाहों के बयान तत्काल दर्ज कराए गए और एसआईटी ने महज 4 दिनों के भीतर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
इस प्रकरण में पुलिस के द्वारा त्वरित कार्यवाही की गई है लेकिन शहर में कानून का खौफ न होने का सच 5 फरवरी को ही तब सामने आ गया जब चंद्रवनी चौक स्थित एक कैफे में युवाओं के बीच विवाद और मारपीट हुई। इस मारपीट में कांग्रेस की युवा नेत्री माही जेटली बुरी तरह से घायल हो गई। माही के सिर पर किसी भारी वस्तु से हमला किया गया। घायल माही को दून अस्पताल उपचार के लिए लाया गया जहां चिकित्सकों द्वारा उनके सिर में 8 टांके लगाए गए। जानकारी के अनुसार कांग्रेसी नेत्री माही जेटली अपने रिश्ते में भाई मदन के जन्मदिन की पार्टी में चंद्रवनी चौक स्थित कैफे में गई थी जहां कुछ युवाओं में भारी विवाद और मारपीट हुई जिसमें माही बुरी तरह से घायल हो गई। मामले की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है जिसमें आयुश राणा, सूरज राणा और हिमांशु के खिलाफ मारपीट और हमले का आरोप लगाया गया है। पुलिस मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की धर-पकड़ की कार्यवाही कर रही है। इसी तरह से 8 फरवरी को ‘जयभारत’ यूट्यूब चैनल के पत्रकार हेम भट्ट के साथ तीन युवकों ने शाम को घर जाते समय उनको रोका और मारपीट की जिसमें हेम भट्ट घायल हो गए। डालनवाल थाने में इसकी रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ लिया है। पत्रकार हेम भट्ट के अनुसार मारपीट करने वाले युवक उनसे ‘‘बहुत ज्यादा खबरें चला रहे हो अब चला कर दिखाना’’ कह कर मारपीट करने लगे थे।
देहरादून पुलिस के इकबाल और कार्यशैली और अपराधों की जांच पर पहले भी कई गम्भीर सवाल उठ चुके हैं। 29 अक्टूबर 2024 में देहरादून के एक निजी विश्वविद्यालय में दक्षिण सूडान के विदेशी छात्रा से एक विदेशी छात्र द्वारा बलात्कार करने का मामला सामने आया था। छात्रा ने दिल्ली में इस मामले की जीरो एफआईआर दर्ज करवाई जिसे दिल्ली पुलिस द्वारा जांच के लिए तत्काल ही देहरादून स्थानांतरित कर दिया। इस प्रकरण में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा विदेशी छात्र को सभी आरोपों से मुक्त करके बरी करते हुए क्लेमेंट थाना जांच अधिकारी के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि जांच अधिकारी द्वारा इस मामले में साईंटिफिक एविडेंस को सिरे से नजरअंदाज किया। छात्रा का आरोप था कि सोते हुए दुष्कर्म किया गया। ऐसे में सामान्य प्रक्रिया के तहत पुलिस को उसके विस्तर की चादर और मौजूद कपड़ों का फाॅरेंसकि जांच के लिए जब्त करना था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। एक विदेशी महिला के साथ बलात्कार की घटना होने और छात्रा द्वारा दिल्ली में जीरो एफआरआई करने के बाद दून पुलिस ने आरोपी छात्र को गिरफ्तार तो किया लेकिन आरोपी को सजा तक पहुंचाने के लिए जांच ही सही तरीके से नहीं की गई जिससे करीब एक वर्ष जेल में रहने के उपरांत आरोपी को सभी आरोपों से मुक्त करके बरी करने के सिवा अदालत के पास कोई विकल्प नहीं बचा। इसी तरह से 2016 में देहरादून के पटेल नगर में हुई हत्या के मुकदमे में दस वर्ष के बाद अपराधियों को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा बरी करने का मामला भी पुलिस की जांच सही न होने के चलते सामने आया है। कुछ अर्सा पहले रेसकोर्स में नाबालिक बच्ची से छेड़खनी के मामले में हुए विवाद में भी पुलिस ने आपसी विवाद मानते हुए संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के बजाय सिर्फ शांतिभंग की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जिसमें आरोपियों की जमानत आसानी से हो गई। आरोपियों ने जमानत पाते ही बच्ची के पक्ष वाले परिवार पर जानलेवा हमला कर दिया जिसमें तीन लोग बुरी तरह से घायल हो गए।
‘नारी’ रिपोर्ट में भी देहरादून महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित शहर 2025 के सितम्बर माह में पी वैल्यू एनालिटिक्स कम्पनी की ‘नेशलन एनुअल रिपोर्ट एंड इंडेक्स’ यानी ‘नारी’ रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार देहरादून को देश के दस सबसे बड़े महिलाओं के लिए असुरक्षित नगरों में रखा गया। यही नहीं देहरादून का महिला सुरक्षा सूचकांक सिर्फ 60.6 प्रतिशत बताया गया जो कि राष्ट्रीय औसत 64.6 प्रतिशत से कम है। इस सर्वे में यह भी बताया गया कि 50 प्रतिशत महिलाएं देहरादून शहर को सबसे सुरक्षित मानती हैं जबकि अन्य शहरों में यह औसत 60 प्रतिशत है। वहीं 10 प्रतिशत महिलाओं ने अपने आपको देहरादून में असुरक्षित या बहुत असुरक्षित बताया।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दिन में 70 प्रतिशत महिलाएं अपने आपको सुरक्षित मानती हंै लेकिन रात होने के बाद सिर्फ 44 प्रतिशत महिलाएं ही अपने आप को सुरक्षित मानती हैं। 6 प्रतिशत महिलाओं ने अपने आपको सार्वजनिक स्थानों पर उत्पीड़न का शिकार हुई बताया जिसमें सबसे अधिक मौखिक रूप से उत्पीड़न बताया गया है।
‘नारी’ रिपोर्ट के सामाने आने के बाद हंगामा मच गया। विपक्षी दलों में खास तौर पर कांग्रेस ने इस रिपोर्ट को आधार बानते हुए राज्य में बढ़ते अपराध और बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। सरकार की खासी किरकरी हुई तो बचाव में राज्य महिला आयोग अध्यक्ष को सामने आना पड़ा जिन्होंने सर्वे के मापदंडों को ही गलत मानते हुए रिपोर्ट को खारिज करने में देर नहीं की। साथ ही आयोग ने राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के हवाले से यह भी बताने का प्रयास किया कि राज्य में महिलाओं पर हो रहे अपराधों की संख्या में बहुत तेजी से कमी आई है। इसके लिए 2022 से लेकर 2024 तक के अपराधों में कमी का ब्यौरा सामने रखते हुए राज्य को खास तौर पर देहरादून नगर को महिलाओं के लिए सुरक्षित बताया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने भी इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए इसके मापदंडों पर सवाल उठाए थे।
31 जनवरी को ऋषिकेश के शिवाजी में 32 वर्षीय प्रीति रावत की हत्या उसके ही पूर्व पे्रमी सुरेश गुप्ता द्वारा रात गोली मार कर कर दी गई। प्रीति रावत एम्स ऋषिकेश में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्य करती थी। पुलिस के अनुसार आरोपी सुरेश गुप्ता और प्रीति के बीच पूर्व में सम्बंध रहे हैं जो कि बाद में बिगड़ गए। सुरेश प्रीति पर विवाह का दवाब बना रहा था जिसे प्रीति ने ठुकरा दिया। इससे नाराज होकर सुरेश गुप्ता ने रात को प्रीति के आवास पर पहुंच कर जाली के दरवाजे से ही सटाकर गोली मार दी जिससे प्रीति की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। पुलिस ने सुरेश गुप्ता को सहारनपुर जिले के छुटमलपुर से गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।
2 फरवरी को देहरादून के व्यस्तम मच्छी बाजार के दुल्हा बाजार में आकाश कुमार ने एक दुकान पर काम करने वाली 23 वर्षीय गुंजन को धारदार हथियार चापड़ से कई वार करके मौत के घाट उतार दिया। खास बात यह है कि बाजार में भीड़ होने के बावजूद हत्यारा आसानी से निकल गया लेकिन किसी ने भी हत्यारे को नहीं रोका। बताया जाता है कि हत्यारा आराम से हत्या करके चापड़ हाथ में लहराता हुआ आसानी से भाग गया। पुलिस ने आकाश कुमार को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।
जानकारी के अनुसार आकाश शादीशुदा और एक बच्चे का बाप है। उसका गुजंन से पूर्व में अच्छे प्रेम सम्बंध थे लेकिन गुंजन को जब से पता चला कि आकाश शादीशुदा है तो उसने उससे सम्बंध तोड़ लिए। लेकिन आकाश उसको निरंतर परेशान करता रहा और गुंजन से शादी करने का दबाव बनाता रहा। इस मामले में एक बात यह भी सामने आई कि आकाश की पत्नी ने गुंजन को बताया कि आकाश चापड़ लेकर घूम रहा है और गुंजन को जान से मारने की बात कह रहा था। इसके बाद गुंजन और उसके परिजनों ने 31 जनवरी को देहरादून कोतवाली क्षेत्र की खुड़बुड़ा चौकी में आकाश के खिलाफ जान का खतरा बताते हुए शिकायत भी दर्ज करवाई लेकिन पुलिस ने इस शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं की। पुलिस में शिकायत करने से आकाश और भी क्रोधित हो गया। दो फरवरी को सुबह करीब दस बजे गुंजन अपनी स्कूटी से दुकान पर पहुंची। आकाश ने अपने स्कूटर से चापड़ निकालकर गुंजन की गर्दन पर कई वार किए। गुंजन ने अपने आप को बचाने का भरपूर प्रयास किया और मदद की गुहार भी लगाई लेकिन गर्दन पर घातक वार के चलते गुंजन वहीं गिर गई। बुरी तरह घायल गुंजन को दून अस्पताल लाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पांच दिनों में जिले में लगातार तीन महिलाओं की नृशंस हत्याओं से कानून व्यवस्था पर गम्भीर सवाल खड़े होने लगे। इसकी आंच मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री स्तर से डीजीपी को कानून व्यवस्था दुरुस्त रखने की बाबत निर्देश जारी होते ही डीजीपी भी कड़े एक्शन में दिखाई दिए और देहरादून जिले में एक के बाद एक हत्याओं के कारण लापरवाही बरतने वाले पुलिस दरोगाओं को निलम्बित कर दिया गया है। राज्य की कानून व्यवस्था के इतिहास में गुंजन हत्याकांड पुलिस व्यवस्था को सुधारने के लिए भी जाना जा सकता है। महज चार दिनों में पुलिस द्वारा चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है। यह उत्तराखण्ड पुलिस के नाम एक रिकॉर्ड माना जा सकता है। चार्जशीट में 35 गवाहों को शामिल किया गया। मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानते हुए एसएसपी देहरादून ने तत्काल इस मामले में एसपी सिटी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी ने दिन रात काम करते हुए घटना स्थल और आस-पास के क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों की जांच और घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम द्वारा वैज्ञानिक तरीके से सबूत एकत्र किए। आरोपी आकाश के स्कूटर और हत्या में प्रयोग चापड़ के साथ-साथ उसके कपड़े जूते और हेलमेंट को भी विधि विज्ञानशाला में भेजा। गवाहों के बयान तत्काल दर्ज कराए गए और एसआईटी ने महज 4 दिनों के भीतर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
इस प्रकरण में पुलिस के द्वारा त्वरित कार्यवाही की गई है लेकिन शहर में कानून का खौफ न होने का सच 5 फरवरी को ही तब सामने आ गया जब चंद्रवनी चौक स्थित एक कैफे में युवाओं के बीच विवाद और मारपीट हुई। इस मारपीट में कांग्रेस की युवा नेत्री माही जेटली बुरी तरह से घायल हो गई। माही के सिर पर किसी भारी वस्तु से हमला किया गया। घायल माही को दून अस्पताल उपचार के लिए लाया गया जहां चिकित्सकों द्वारा उनके सिर में 8 टांके लगाए गए। जानकारी के अनुसार कांग्रेसी नेत्री माही जेटली अपने रिश्ते में भाई मदन के जन्मदिन की पार्टी में चंद्रवनी चौक स्थित कैफे में गई थी जहां कुछ युवाओं में भारी विवाद और मारपीट हुई जिसमें माही बुरी तरह से घायल हो गई। मामले की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है जिसमें आयुश राणा, सूरज राणा और हिमांशु के खिलाफ मारपीट और हमले का आरोप लगाया गया है। पुलिस मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की धर-पकड़ की कार्यवाही कर रही है। इसी तरह से 8 फरवरी को ‘जयभारत’ यूट्यूब चैनल के पत्रकार हेम भट्ट के साथ तीन युवकों ने शाम को घर जाते समय उनको रोका और मारपीट की जिसमें हेम भट्ट घायल हो गए। डालनवाल थाने में इसकी रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ लिया है। पत्रकार हेम भट्ट के अनुसार मारपीट करने वाले युवक उनसे ‘‘बहुत ज्यादा खबरें चला रहे हो अब चला कर दिखाना’’ कह कर मारपीट करने लगे थे।
दून पुलिस पर पहले भी उठते रहे सवाल
देहरादून पुलिस के इकबाल और कार्यशैली और अपराधों की जांच पर पहले भी कई गम्भीर सवाल उठ चुके हैं। 29 अक्टूबर 2024 में देहरादून के एक निजी विश्वविद्यालय में दक्षिण सूडान के विदेशी छात्रा से एक विदेशी छात्र द्वारा बलात्कार करने का मामला सामने आया था। छात्रा ने दिल्ली में इस मामले की जीरो एफआईआर दर्ज करवाई जिसे दिल्ली पुलिस द्वारा जांच के लिए तत्काल ही देहरादून स्थानांतरित कर दिया। इस प्रकरण में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा विदेशी छात्र को सभी आरोपों से मुक्त करके बरी करते हुए क्लेमेंट थाना जांच अधिकारी के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि जांच अधिकारी द्वारा इस मामले में साईंटिफिक एविडेंस को सिरे से नजरअंदाज किया। छात्रा का आरोप था कि सोते हुए दुष्कर्म किया गया। ऐसे में सामान्य प्रक्रिया के तहत पुलिस को उसके विस्तर की चादर और मौजूद कपड़ों का फाॅरेंसकि जांच के लिए जब्त करना था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। एक विदेशी महिला के साथ बलात्कार की घटना होने और छात्रा द्वारा दिल्ली में जीरो एफआरआई करने के बाद दून पुलिस ने आरोपी छात्र को गिरफ्तार तो किया लेकिन आरोपी को सजा तक पहुंचाने के लिए जांच ही सही तरीके से नहीं की गई जिससे करीब एक वर्ष जेल में रहने के उपरांत आरोपी को सभी आरोपों से मुक्त करके बरी करने के सिवा अदालत के पास कोई विकल्प नहीं बचा। इसी तरह से 2016 में देहरादून के पटेल नगर में हुई हत्या के मुकदमे में दस वर्ष के बाद अपराधियों को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा बरी करने का मामला भी पुलिस की जांच सही न होने के चलते सामने आया है। कुछ अर्सा पहले रेसकोर्स में नाबालिक बच्ची से छेड़खनी के मामले में हुए विवाद में भी पुलिस ने आपसी विवाद मानते हुए संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के बजाय सिर्फ शांतिभंग की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जिसमें आरोपियों की जमानत आसानी से हो गई। आरोपियों ने जमानत पाते ही बच्ची के पक्ष वाले परिवार पर जानलेवा हमला कर दिया जिसमें तीन लोग बुरी तरह से घायल हो गए।
‘नारी’ रिपोर्ट में भी देहरादून महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित शहर 2025 के सितम्बर माह में पी वैल्यू एनालिटिक्स कम्पनी की ‘नेशलन एनुअल रिपोर्ट एंड इंडेक्स’ यानी ‘नारी’ रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार देहरादून को देश के दस सबसे बड़े महिलाओं के लिए असुरक्षित नगरों में रखा गया। यही नहीं देहरादून का महिला सुरक्षा सूचकांक सिर्फ 60.6 प्रतिशत बताया गया जो कि राष्ट्रीय औसत 64.6 प्रतिशत से कम है। इस सर्वे में यह भी बताया गया कि 50 प्रतिशत महिलाएं देहरादून शहर को सबसे सुरक्षित मानती हैं जबकि अन्य शहरों में यह औसत 60 प्रतिशत है। वहीं 10 प्रतिशत महिलाओं ने अपने आपको देहरादून में असुरक्षित या बहुत असुरक्षित बताया।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दिन में 70 प्रतिशत महिलाएं अपने आपको सुरक्षित मानती हंै लेकिन रात होने के बाद सिर्फ 44 प्रतिशत महिलाएं ही अपने आप को सुरक्षित मानती हैं। 6 प्रतिशत महिलाओं ने अपने आपको सार्वजनिक स्थानों पर उत्पीड़न का शिकार हुई बताया जिसमें सबसे अधिक मौखिक रूप से उत्पीड़न बताया गया है।
‘नारी’ रिपोर्ट के सामाने आने के बाद हंगामा मच गया। विपक्षी दलों में खास तौर पर कांग्रेस ने इस रिपोर्ट को आधार बानते हुए राज्य में बढ़ते अपराध और बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। सरकार की खासी किरकरी हुई तो बचाव में राज्य महिला आयोग अध्यक्ष को सामने आना पड़ा जिन्होंने सर्वे के मापदंडों को ही गलत मानते हुए रिपोर्ट को खारिज करने में देर नहीं की। साथ ही आयोग ने राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के हवाले से यह भी बताने का प्रयास किया कि राज्य में महिलाओं पर हो रहे अपराधों की संख्या में बहुत तेजी से कमी आई है। इसके लिए 2022 से लेकर 2024 तक के अपराधों में कमी का ब्यौरा सामने रखते हुए राज्य को खास तौर पर देहरादून नगर को महिलाओं के लिए सुरक्षित बताया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने भी इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए इसके मापदंडों पर सवाल उठाए थे।
एसएसपी देहरादून अजय सिंह ने इस मामले में बकायदा प्रेसवार्ता करके कहा कि सर्वे की जांच की गई जिसमें मापदंडों का उल्लंघन पाया गया। गौरतलब है कि पी वैल्यू एनालिटिक्स कम्पनी द्वारा किया गया सर्वे पूरे देश में महज 12770 महिलाओं से टेलीफोन पर बातचीत पर आधारित था जिसमें देहरादून में सिर्फ 400 महिलाओं को ही इस सर्वे में शामिल करके देहरादून को देश के दस सबसे बड़े महिलाओं के लिए असुरक्षित शहरों की श्रेणी में रखा गया। देहरादून की कुल आबादी नौ लाख है। नौ लाख लोगों में महज 400 महिलाओं की बातचीत पर किए गए सर्वे को संदिग्ध माना गया। इस मामले में दून पुलिस द्वारा सर्वे करने वाली कम्पनी पी वैल्यू एनालिटिक्स को नोटिस जारी करके जवाब मांगा गया साथ ही इस मामले में गहन जांच करने की बात भी कही गई। हालांकि यह भी सच है कि जिस तरह से पी वैल्यु एनालिटिक्स ने देहरादून की नौ लाख की आबादी पर महज 400 महिलाओं से टेलीफोन पर बातचीत कर देहरादून को देश के दस सबसे बड़े महिलाओं के लिए असुरक्षित नगर की श्रेणी में रखा जाना तर्कसंगत है लेकिन जिस तरह से देहरादून जिले में महज पांच दिनों के भीतर तीन महिलाओं की नृशंस हत्याएं हुई हैं उससे दून पुलिस के दावों की पोल तो खुल ही रही है साथ ही ‘नारी’ रिपोर्ट को एक दम से खारिज करने के दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जिस तरह से प्रदेश में आपराधिक घटनाएं हो रही हैं वह निश्चित तौर पर चिंता का विषय है। सरकार इस पर बड़ा कदम उठाने जा रही है जिससे अपराध और अपराधियों पर पूरी तरह से नियंत्रण किया जा सके।
विनोद चमोली, विधायक एवं प्रदेश प्रवक्ता भाजपा
प्रदेश में अपराधियों का दुस्साहस चरम पर है, महिलाओं की सुरक्षा में धामी सरकार पूरी तरह से विफल हो चुकी है। पांच दिनों के भीतर दो कामकाजी महिलाओं और एक छात्रा की हत्या से साफ हो गया है कि समूचे प्रदेश की कानून व्यवस्था को लकवा मार गया है। देहरादून जैसे अति संवेदनशील ओैर प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिला और नगर जिसमें सरकार, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी के साथ-साथ समूचा प्रदेश का सरकारी तंत्र हर वक्त मौजूद है उसी शहर देहरादून में दिन दहाड़े एक कामकाजी महिला की नृशंस हत्या कर दी जाती है लेकिन सरकार और कानून व्यवस्था तंत्र को कोई फर्क नहीं पड़ता। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वह कभी भी, कहीं भी आसानी से वारदात कर जाते हैं। पत्रकार हेम भट्ट पर तीन लोगों ने हमला करके उनको बुरी तरह से घायल कर दिया। अब तो पत्रकार भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। जब देहरादून जैसे शहर के हालात इस तरह हो चुके हैं तो प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों के हालात कैसे होंगे? यह साफ पता चल रहा है। आज पुलिस का खौफ सिर्फ आम आदमी में ही दिखता है लेकिन अपराधियों में पुलिस और सरकार का खौफ पूरी तरह से खत्म हो चुका है। कांग्रेस पार्टी सरकार से मांग करती हैे कि जिन भी पुलिसकर्मियों, अधिकारियों का नाम लापरवाही बरतने में सामने आया है उनके खिलाफ तत्काल प्रभाव से कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाए। साथ ही महिला अपराध की उच्च स्तरीय जांच की हो और अपराधियों पर फास्ट ट्रैक कोर्ट में कार्यवाही की चले। स्कूल, कॉलेजों और कार्यस्थलों पर तुरंत ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए।
गरिमा महरा दसौनी, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस
देहरादून जिले में पिछले पांच दिनों में तीन महिलाओं की हत्या होने ने कई सवालों को जन्म दे दिया है। 29 फरवरी को विकास नगर में एक छात्रा का शव मिला जिसे नृशंस तरीके से मार दिया गया। 31 जनवरी को ऋषिकेश में एक कामकाजी महिला को उसके ही घर में मौत के घाट उतार दिया गया और 2 फरवरी को देहरादून के मच्छी बाजार में एक सिरफिरे ने एक बालिका की नृशंस हत्या दिन दहाड़े कर दी। जब हम उत्तराखण्ड राज्य और देहरादून में महिलाओं पर हो रहे अपराधों के इतिहास और आंकड़ों पर सरसरी नजर डालते हैं तो नेशनल क्राइम ब्यूरो का डेटा भी हमें यह बताता है कि समस्त हिमालयी राज्यों में महिलाओं पर हो रहे अपराधों की फेहरिस्त में उत्तराखण्ड सबसे ऊपर है। आज से तीन साल पहले अंकिता भंडारी हत्याकांड हुआ जो पूरे देश-विदेश में भी चर्चित हुआ। इस मामले में जो कथित वीआईपी के नाम के मामले में सरकार लीपापोती करने में ही लगी हुई है। अगस्त 2025 में देहरादून शहर का नाम देश में ‘अनसेफ फाॅर वूमेन’ में दस शहरों में सबसे आगे आया था लेकिन तब यहां की पुलिस और राज्य महिला आयोग ने उस रिपोर्ट को ही खारिज कर दिया और रिपोर्ट जारी करने वाली संस्था पर ही बहुत से सवाल खड़े कर दिए थे। अब इसका समाधान क्या हो यह सवाल सबसे जरूरी है। जब तक यहां की सरकार और मुख्यमंत्री ऐसे मामलों में अपनी चुप्पी साधे रहेंगे, ‘लिविंग एंड डिनायल’ की थ्योरी पर विलीव करेंगे, तब तक इस बात को नहीं स्वीकारेंगे कि उत्तराखण्ड में महिलाओं की सुरक्षा तार-तार हो चुकी है, का कहीं कोई समाधान निकलने वाला नहीं है। अब चाहे पुलिस रिफाॅर्म की बात हो, पुलिस के ट्रांसफर की बात हो या पुलिसकर्मियों को पुलिसिंग से हटाकर सैकड़ों माफियाओं, खनन के कामों में लगे हुए लोगों की सुरक्षा में लगाने की बात हो या आम पब्लिक को कम्युनिटी पुलिसिंग में काम करने की बात हो तो ऐसे तमाम बहुत सारे पहलू हैं जिन पर काम करने की आवश्यकता है। तभी जाकर हम अपने राज्य की पचास प्रतिशत आबादी महिलाओं, बच्चियों को सुरक्षा प्रदान कर पाएंगे लेकिन इसके मूल में एक्नॉलेजमेंट होना बहुत जरूरी है। मैं इतना कहना चाहूंगा कि 29 जनवरी, 31 जनवरी और 2 फरवरी के मामलों में तुरंत न्याय मिलना चाहिए जो दिखना भी चाहिए।
अनूप नौटियाल, अध्यक्ष, सोशल डेवलेपमेंट फाॅर कम्यूनीटिज फाउंडेशन, देहरादून
निश्चित तौर पर दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुई है। तीन महिलाओं की हत्या होना दुखद घटना है जिसे नकारा नहीं जा सकता। तीनों ही मामलों में एक बात यह है कि तीनों हत्यारों से पूर्व से ही परिचित थी। चाहे ऋषिकेश का मामला हो या देहरादून का या फिर विकास नगर का। राज्य महिला आयोग हमेशा से प्रयास करता रहा है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति पहले ही सचेत रहने की जरूरत है। आज सबसे ज्यादा समस्या सोशल मीडिया से ही हो रही है। परिवार के लोगों को भी सचेत रहने की जरूरत है। देहरादून में जब यह घटना हो रही थी तब किसी ने उस महिला को बचाने का प्रयास तक नहीं किया। अगर समाज के लोग प्रयास करते तो महिला के साथ ऐसा नहीं होता। आयोग और सरकार ऐसे अपराधियों को कठोरतम सजा दिलवाने में पीछे नहीं रहेगी। जिस रिपोर्ट की बात आप कर रहे हैं उसके आंकड़े संदेहास्पद थे। 9 लाख की आबादी में सिर्फ चार सौ महिलाओं से टेलीफोन पर बात करके देहरादून शहर को महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित शहर बता दिया गया। हमने रिपोर्ट को इसी कारण खारिज किया और कम्पनी को कहा कि आप अपना सर्वे का आधार बताएं। आज सबसे ज्यादा समाज और परिवार को सचेत होने की जरूरत है जरा भी किसी को लगता हेै कि इस मामले में कोई घटना हो सकती है तो तुरंत पुलिस को बताना चाहिए जिससे महिलाओं के खिलाफ अपराध पहले ही रूक जाएं।
बात अपनी-अपनी
जिस तरह से प्रदेश में आपराधिक घटनाएं हो रही हैं वह निश्चित तौर पर चिंता का विषय है। सरकार इस पर बड़ा कदम उठाने जा रही है जिससे अपराध और अपराधियों पर पूरी तरह से नियंत्रण किया जा सके।
विनोद चमोली, विधायक एवं प्रदेश प्रवक्ता भाजपा
प्रदेश में अपराधियों का दुस्साहस चरम पर है, महिलाओं की सुरक्षा में धामी सरकार पूरी तरह से विफल हो चुकी है। पांच दिनों के भीतर दो कामकाजी महिलाओं और एक छात्रा की हत्या से साफ हो गया है कि समूचे प्रदेश की कानून व्यवस्था को लकवा मार गया है। देहरादून जैसे अति संवेदनशील ओैर प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिला और नगर जिसमें सरकार, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी के साथ-साथ समूचा प्रदेश का सरकारी तंत्र हर वक्त मौजूद है उसी शहर देहरादून में दिन दहाड़े एक कामकाजी महिला की नृशंस हत्या कर दी जाती है लेकिन सरकार और कानून व्यवस्था तंत्र को कोई फर्क नहीं पड़ता। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वह कभी भी, कहीं भी आसानी से वारदात कर जाते हैं। पत्रकार हेम भट्ट पर तीन लोगों ने हमला करके उनको बुरी तरह से घायल कर दिया। अब तो पत्रकार भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। जब देहरादून जैसे शहर के हालात इस तरह हो चुके हैं तो प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों के हालात कैसे होंगे? यह साफ पता चल रहा है। आज पुलिस का खौफ सिर्फ आम आदमी में ही दिखता है लेकिन अपराधियों में पुलिस और सरकार का खौफ पूरी तरह से खत्म हो चुका है। कांग्रेस पार्टी सरकार से मांग करती हैे कि जिन भी पुलिसकर्मियों, अधिकारियों का नाम लापरवाही बरतने में सामने आया है उनके खिलाफ तत्काल प्रभाव से कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाए। साथ ही महिला अपराध की उच्च स्तरीय जांच की हो और अपराधियों पर फास्ट ट्रैक कोर्ट में कार्यवाही की चले। स्कूल, कॉलेजों और कार्यस्थलों पर तुरंत ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए।
गरिमा महरा दसौनी, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस
देहरादून जिले में पिछले पांच दिनों में तीन महिलाओं की हत्या होने ने कई सवालों को जन्म दे दिया है। 29 फरवरी को विकास नगर में एक छात्रा का शव मिला जिसे नृशंस तरीके से मार दिया गया। 31 जनवरी को ऋषिकेश में एक कामकाजी महिला को उसके ही घर में मौत के घाट उतार दिया गया और 2 फरवरी को देहरादून के मच्छी बाजार में एक सिरफिरे ने एक बालिका की नृशंस हत्या दिन दहाड़े कर दी। जब हम उत्तराखण्ड राज्य और देहरादून में महिलाओं पर हो रहे अपराधों के इतिहास और आंकड़ों पर सरसरी नजर डालते हैं तो नेशनल क्राइम ब्यूरो का डेटा भी हमें यह बताता है कि समस्त हिमालयी राज्यों में महिलाओं पर हो रहे अपराधों की फेहरिस्त में उत्तराखण्ड सबसे ऊपर है। आज से तीन साल पहले अंकिता भंडारी हत्याकांड हुआ जो पूरे देश-विदेश में भी चर्चित हुआ। इस मामले में जो कथित वीआईपी के नाम के मामले में सरकार लीपापोती करने में ही लगी हुई है। अगस्त 2025 में देहरादून शहर का नाम देश में ‘अनसेफ फाॅर वूमेन’ में दस शहरों में सबसे आगे आया था लेकिन तब यहां की पुलिस और राज्य महिला आयोग ने उस रिपोर्ट को ही खारिज कर दिया और रिपोर्ट जारी करने वाली संस्था पर ही बहुत से सवाल खड़े कर दिए थे। अब इसका समाधान क्या हो यह सवाल सबसे जरूरी है। जब तक यहां की सरकार और मुख्यमंत्री ऐसे मामलों में अपनी चुप्पी साधे रहेंगे, ‘लिविंग एंड डिनायल’ की थ्योरी पर विलीव करेंगे, तब तक इस बात को नहीं स्वीकारेंगे कि उत्तराखण्ड में महिलाओं की सुरक्षा तार-तार हो चुकी है, का कहीं कोई समाधान निकलने वाला नहीं है। अब चाहे पुलिस रिफाॅर्म की बात हो, पुलिस के ट्रांसफर की बात हो या पुलिसकर्मियों को पुलिसिंग से हटाकर सैकड़ों माफियाओं, खनन के कामों में लगे हुए लोगों की सुरक्षा में लगाने की बात हो या आम पब्लिक को कम्युनिटी पुलिसिंग में काम करने की बात हो तो ऐसे तमाम बहुत सारे पहलू हैं जिन पर काम करने की आवश्यकता है। तभी जाकर हम अपने राज्य की पचास प्रतिशत आबादी महिलाओं, बच्चियों को सुरक्षा प्रदान कर पाएंगे लेकिन इसके मूल में एक्नॉलेजमेंट होना बहुत जरूरी है। मैं इतना कहना चाहूंगा कि 29 जनवरी, 31 जनवरी और 2 फरवरी के मामलों में तुरंत न्याय मिलना चाहिए जो दिखना भी चाहिए।
अनूप नौटियाल, अध्यक्ष, सोशल डेवलेपमेंट फाॅर कम्यूनीटिज फाउंडेशन, देहरादून
निश्चित तौर पर दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुई है। तीन महिलाओं की हत्या होना दुखद घटना है जिसे नकारा नहीं जा सकता। तीनों ही मामलों में एक बात यह है कि तीनों हत्यारों से पूर्व से ही परिचित थी। चाहे ऋषिकेश का मामला हो या देहरादून का या फिर विकास नगर का। राज्य महिला आयोग हमेशा से प्रयास करता रहा है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति पहले ही सचेत रहने की जरूरत है। आज सबसे ज्यादा समस्या सोशल मीडिया से ही हो रही है। परिवार के लोगों को भी सचेत रहने की जरूरत है। देहरादून में जब यह घटना हो रही थी तब किसी ने उस महिला को बचाने का प्रयास तक नहीं किया। अगर समाज के लोग प्रयास करते तो महिला के साथ ऐसा नहीं होता। आयोग और सरकार ऐसे अपराधियों को कठोरतम सजा दिलवाने में पीछे नहीं रहेगी। जिस रिपोर्ट की बात आप कर रहे हैं उसके आंकड़े संदेहास्पद थे। 9 लाख की आबादी में सिर्फ चार सौ महिलाओं से टेलीफोन पर बात करके देहरादून शहर को महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित शहर बता दिया गया। हमने रिपोर्ट को इसी कारण खारिज किया और कम्पनी को कहा कि आप अपना सर्वे का आधार बताएं। आज सबसे ज्यादा समाज और परिवार को सचेत होने की जरूरत है जरा भी किसी को लगता हेै कि इस मामले में कोई घटना हो सकती है तो तुरंत पुलिस को बताना चाहिए जिससे महिलाओं के खिलाफ अपराध पहले ही रूक जाएं।