साउथ सिनेमा के सुपर स्टार विजय का 51 की उम्र में सिनेमा को अलविदा कहने का फैसला भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक युगांतकारी क्षण है। करीब 69 फिल्मों के शानदार करियर के शिखर पर लिया गया यह निर्णय न केवल उनके फैंस के लिए भावनात्मक है बल्कि यह भी दर्शाता है कि वह अब पूरी गम्भीरता के साथ राजनीति में नई पारी शुरू करने जा रहे हैं

दक्षिण भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में शुमार विजय ने 51 वर्ष की उम्र में फिल्मों से संन्यास लेने का जो निर्णय लिया है, उसने न केवल उनके प्रशंसकों को भावुक कर दिया है बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री को भी चैंका दिया है। आमतौर पर अभिनेता अपने करियर को लम्बे समय तक खींचने की कोशिश करते हैं लेकिन विजय ने अपने करियर के चरम पर ही रुकने का फैसला लेकर एक अलग मिसाल पेश की है।

विजय का फिल्मी सफर बेहद दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपने पिता एस.ए. चंद्रशेखर के निर्देशन में बतौर बाल कलाकार शुरुआत की लेकिन शुरुआती वर्षों में उन्हें संघर्ष भी करना पड़ा। 1990 के दशक के अंत तक वह एक स्थापित अभिनेता बन चुके थे लेकिन असली स्टारडम उन्हें 2000 के दशक में मिला।
फिल्म ‘घिल्ली’ उनके करियर की पहली बड़ी ब्लाॅकबस्टर साबित हुई, जिसने उन्हें ‘मास हीरो’ के रूप में स्थापित किया। इसके बाद ‘पोक्किरी’ ने बाॅक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड बनाए और विजय को सुपरस्टार की श्रेणी में पहुंचा दिया। ‘थुप्पाक्की’ ने उनके एक्शन हीरो इमेज को और मजबूत किया और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
विजय की खासियत यह रही कि उन्होंने सिर्फ एक्शन ही नहीं बल्कि सामाजिक और भावनात्मक विषयों को भी अपनी फिल्मों में जगह दी। ‘मर्सल’ में मेडिकल सिस्टम पर सवाल उठाए गए जबकि ‘बिगिल’ में महिला
सशक्तिकरण का संदेश दिया गया। ‘मास्टर’ में उन्होंने एक अलग अंदाज में अभिनय कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित की।
फिल्म ‘थेरी’ भी उनके करियर की बड़ी हिट फिल्मों में शामिल रही, जिसने बाॅक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। निर्देशक एटली की इस फिल्म ने लगभग 75 करोड़ के बजट में 150 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की।
दिलचस्प बात यह है कि इसी फिल्म का बाॅलीवुड रीमेक ‘बेबी जाॅन’ बनाया गया, जिसमें वरुण धवन मुख्य भूमिका में नजर आए। हालांकि 180 करोड़ के भारी बजट के बावजूद यह फिल्म बाॅक्स ऑफिस पर केवल लगभग 56 करोड़ रुपए ही कमा सकी और बड़ी फ्लाॅप साबित हुई। इससे यह साफ हो गया कि विजय की फिल्मों की सफलता में उनकी स्टार पावर और दर्शकों से जुड़ाव की बड़ी भूमिका होती है। विजय की लोकप्रियता सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही। समय के साथ उनकी छवि एक जन नेता के रूप में भी उभरी है। उनके फैंस उन्हें सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि एक प्रेरणा के रूप में देखते हैं। यही कारण है कि अब उनका राजनीति की ओर रुख करना एक स्वाभाविक कदम माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि उनकी आखिरी फिल्म जन नायकन होगी, जिसके बाद वह पूरी तरह राजनीति में सक्रिय हो जाएंगे। उनके इस फैसले से जहां एक ओर सिनेमा को एक बड़ा सितारा खोना पड़ेगा, वहीं दूसरी तरफ राजनीति को एक लोकप्रिय चेहरा मिलेगा।
51 वर्ष की उम्र में लिया गया यह निर्णय केवल करियर का मोड़ नहीं बल्कि एक नई शुरुआत है। विजय ने यह साबित किया है कि सही समय पर लिया गया फैसला ही किसी व्यक्ति को असाधारण बनाता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जिस तरह उन्होंने सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई, क्या उसी तरह राजनीति में भी वह ‘थलपति’ बनकर उभरेंगे।

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