वर्ष 2023 में ऋषिकेश स्थित एम्स अस्पताल उस समय सुर्खियों में रहा जब नर्सिंग नौकरी पाने वाले 800 में से 600 अभ्यर्थी राजस्थान के थे। तब यह भर्तियां केंद्र सरकार के अधीन थी। इसके बाद नर्सिंग भर्ती का अधिकार राज्य सरकार के पाले में आ गया लेकिन अब वर्षवार भर्ती न होने का मामला अभ्यर्थियों के लिए रोजगार में रुकावट बनकर सामने आ गया है। इसके चलते 2 हजार अभ्यर्थी इस भर्ती से दूर हैं। महिला प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने इस मुद्दे पर आत्महत्या का प्रयास कर सरकार को आंदोलनकारियों की मांग पर गम्भीरता से सोचने को मजबूर कर दिया है। सरकार हिमाचल की तर्ज पर भर्ती नियमावली में संशोधन करने और जल्द ही इसे कैबिनेट में लाने की बात कह रही है
नर्सिंग भर्ती में वर्षवार भर्ती नियम लागू किए जाने की मांग को लेकर अभ्यर्थी देहरादून में पिछले पांच माह से ‘नर्सिंग एकता मंच’ के बैनर तले धरना दे रहे हैं। 22 दिनों तक उनका आमरण-अनशन भी चला। इसके बाद बेरोजगार युवाओं का धैर्य जवाब दे गया। आंदोलनकारी अपनी मांगों को मनवाने के लिए पानी की टंकी पर तक चढ़ गए। इसी बीच एक ऐसी घटना घटी जिसने सबका ध्यान इस आंदोलन की तरफ आकर्षित कर दिया। आंदोलनकारियों को अपना समर्थन देने गई महिला प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला पानी की टंकी पर चढ़ गई और अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क लिया। हालांकि आंदोलनकारियों ने उनको किसी तरह से रोक लिया। कहा जा रहा है कि ज्योति रौतेला आत्मदाह तक करने वाली थी। इसके बाद आंदोलनकारियों ने सड़क पर जाम लगा दिया। बाद में आंदोलनकारी देर रात सड़क से हटकर परेड ग्राउड में चले गए।
आंदोलनकारियों की सरकार से प्रमुख मांग यह है कि वर्षवार नियम के तहत भर्ती की जाए और छूटे हुए 2 हजार अभ्यर्थियों को भी इस भर्ती में शामिल किया जाए। राज्य में नर्सिंग भर्ती में आधे से ज्यादा अभ्यर्थी भर्ती हो चुके हैं लेकिन करीब 2 हजार ऐसे अभ्यर्थी हैं जिनको इस प्रक्रिया में शामिल ही नहीं किया गया है। इसमें अधिकतर ऐसे अभ्यर्थी हैं जो भर्ती आयु के पूरी होने के नियम के करीब आ चुके हैं। छूटे हुए अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर वर्षवार भर्ती होती रहती तो वे भी भर्ती हो सकते थे।
यह पूरा मामला राज्य सरकार की भर्ती नीतियों में बदलाव को लेकर है। पूर्व में राज्य में नर्सिंग भर्ती वर्ष वार मेरिट के आधार पर भर्तियां होती थी जिसमें नर्सिंग पास आउट अभ्यर्थियों को भर्ती का मौका मिल जाता था। अचानक से सरकार ने नियम परिवर्तित करके वर्षवार भर्ती न करने का निर्णय लिया जिसके चलते वे अभ्यर्थी भर्ती से छूट गए जो वर्षवार भर्ती की आस में बैठे थे। आंदोलनकारियों का कहना है कि वर्षवार भर्ती न होने से राज्य में बेरोजागारों की संख्या बढ़ रही है। भर्तियां सिर्फ कुछ ही सौ होती हैं लेकिन प्रतिवर्ष नर्सिंग पास आउट अभ्यर्थी कहीं अधिक होते हैं। नियम परिवर्तन का असर यह है कि दस बारह वर्ष पूर्व पास आउट अभ्यर्थियों को नए सिलेबस का ज्ञान नहीं है और वे भर्ती परीक्षा के माध्यम से पास नहीं हो पाएंगे।
पूरा मामला यहीं पर फंसा हुआ है। राज्य सरकार नर्सिंग भर्ती को भी भर्ती परीक्षा के माध्यम से करवा रही है जिसमें नए-नए पास आउट अभ्यर्थी आसानी से भती हो रहे हैं जबकि पूर्व के अभ्यर्थी अनुभव के आधार पर भर्ती करवाने की मांग पर अड़े हुए हैं। इसमें कांग्रेस के नेता आगे आए। कांग्रेस के नेता हरक सिंह रावत और प्रीतम सिंह ने इस सम्बंध में स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के साथ बैठक की थी जिसमें कोई निर्णय तो नहीं निकला लेकिन भर्ती नियमावली में अनुभव के आधार पर भर्ती के लिए संशोधन करने का आश्वासन जरूर दिया गया है। इसके लिए उत्तराखण्ड सरकार हिमाचल प्रदेश के नर्सिंग भर्ती पैटर्न का अध्ययन करके कोई न कोई समाधान निकालेगी और इस मामले के निस्तारण के लिए कैबिनेट में भी प्रस्ताव रखेगी। हिमाचल प्रदेश नर्सिंग भर्ती मामले में राज्य सरकार ने नियमावली में संशोधन कर 30 प्रतिशत मेरिट और 70 प्रतिशत पदों को सीधी भर्ती के तहत भरा जा रहा है। आंदोलनकारियों की मांग है कि हिमाचल की ही तर्ज पर राज्य में भी नर्सिंग के पदों पर भर्ती की जाए।
चुनावी वर्ष में बेरोजगारों के इस आंदोलन के उग्र होने की आशंका के चलते सरकार और शासन का तंत्र हरकत में आया। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनिता टम्टा आंदोलन स्थल परेड ग्राउंड पर भी पहुंची थी। उन्होंने आंदोलनकारियों के साथ लम्बी बातचीत की जिसमें स्वास्थ्य मंत्री द्वारा निदेशालय को आंदोलनकारियों की मांगों के बारे में भेजे गए पत्र को आधार बना कर शासन को आंदा नौकरियों की मांगों का प्रस्ताव भेज दिया। तब से आंदोलनकारी सरकार के अगले कदम के इंतजार में हैं। इस मामले में सरकार और शासन क्या कदम उठाते हैं, इसका सभी को इंतजार है। याद रहे कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि इस मामले को कैबिनेट में लाकर आंदोलनकारियों की मांगों का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
पुलिस-प्रशासन ने इस आंदोलन में महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला और अन्य चार आंदोलनकारियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया है। इस मामले में ज्योति रौतेला की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि आंदोलन बेहद शांतिपूर्वक चल रहा था तो ऐसे में ज्योति रौतेला ने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़कर कर आत्मदाह करने का प्रयास क्यों किया? जिससे आंदोलन के उग्र होने की आशंका बढ़ गई। भाजपा ने कांग्रेस नेत्री द्वारा बेरोजगारों के आंदोलन को जान-बूझकर हिंसक बनाने और राज्य की कानून व्यवस्था को बिगाड़ने का षड्यंत्र करने का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
राज्य के पाले में बेरोजगारों की गेंद
वर्ष 2018 से लेकर 2020 के अंतराल में ऋषिकेश एम्स में 800 पदों के लिए भर्तियां निकाली गई जिसमें सभी प्रदेश के युवाओं ने आवेदन किए थे। 800 पदों में से 600 पदों के लिए राजस्थान के लोगों का चयन किया गया। एक साथ एक ही राज्य के सैकड़ों लोगों को एक ही स्थान पर नियुक्तियां देने का यह मामला सामने आने के बाद समूचे उत्तराखण्ड प्रदेश में हंगामा मचा। इसे राज्य के बेरोजगार युवाओं के हितों पर कुठाराघात होने की बात कही गई। इसको लेकर बेरोजगारों ने कई बार सरकार से अपनी बात रखी साथ ही राज्य में बाहरी प्रदेशों के युवाओं को भर्ती करने के मामले में स्थानीय बेरोजगारों को वरीयता दिए जाने की मांग भी की। तब यह बात भी सामने आई थी कि उत्तराखण्ड प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की कमी होने के चलते राज्य के अभ्यर्थी अन्य राज्यों की भर्ती परीक्षा में सफल नहीं हो पा रहे हैं जबकि राजस्थान और दक्षिण भारतीय राज्यों के अभ्यर्थी केंद्र सरकार की भर्ती योजना में बेहतर प्रदर्शन कर सफल हो रहे हैं। फिलहाल मामला केंद्र के पाले से निकलकर राज्य के अधीन हो चुका है क्योंकि अब नर्सिंग भर्ती प्रदेश सरकार के द्वारा की जा रही है जिसमें राज्य के ही नर्सिंग अभ्यर्थियों की भर्ती होनी है जबकि करीब 2 हजार ऐसे अभ्यर्थी हैं जिनको भर्ती प्रक्रिया में शामिल ही नहीं किया जा रहा है। ऐसे में पांच महीने से चले आ रहे आंदोलन का रुख अब क्या होगा यह भी देखना होगा?
बात अपनी-अपनी
मैं स्वयं परेड ग्राउंड में आंदोलनकारियों से मिली, हमारी बातचीत हुई। नर्सिंग बेरोजगारों की मांग वर्षवार भर्ती किए जाने की थी। हमने उनकी मांगों के सम्बंध में सेवा नियमावली का जिक्र करते हुए पूर्व में जो व्यवस्था की कई थी उसको मूल रूप से कोड करते हुए एक पत्र शासन को प्रेषित कर दिया है। शासन उस पर विचार करेगा। अब सरकार और शासन इस पर निर्णय लेगा तथा जो भी डेटा या तथ्य रखे जाने होंगे वह हमारे द्वारा शासन के सामने रखे जाएंगे।
डाॅ. सुनीता टम्टा, महा निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड
हम 160 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने में बैठेे हुए थे जिसमें 22 दिन आमरण-अनशन पर थे जिससे हमारे कई अभ्यर्थी बीमार होकर अस्पताल तक पहुंच गए लेकिन सरकार ने हमारी न तो कोई सुध ली और न ही हमारी मांगों को माना। हम सरकार की उदासीनता के कारण परेड ग्राउंड पहुंचे और 56 घंटों से ज्यादा समय तक हमारे पांच आंदोलनकारी टंकी पर चढ़े रहे। हमारी सिर्फ एक ही मांग है कि वर्षवार भर्ती के तहत हमारे जो छूटे हुए अभ्यर्थी हैं उनको भी राज्य में नर्सिंग भर्ती में मौका मिले। हमारे कई साथी और हमारे जूनियर तक भी भर्ती हो चुके हैं। पूरे प्रदेश में हमारे सिर्फ 2 हजार लोग ही छूटे हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्री जी से हमारी बात हुई लेकिन हमारी मांगों का कोई हल नहीं निकाला जा सका। अब हमारे आंदोलन के नए रुख के बाद उनका कहना है कि हिमाचल प्रदेश की नियमावली का अध्ययन करेंगे। हमारा कहना है कि उत्तराखण्ड राज्य बने हुए 25 वर्ष हो गए हंै लेकिन क्या सरकार इतनी कमजोर है जो अपने प्रदेश की नियमावली नहीं बना सकती? हर बार उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश की नियमावली शासनादेश का अध्ययन क्यों करना पड़ रहा है? पूर्व स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत जी ने स्वास्थ्य सचिव को हमारे प्रकरण के निस्तारण के लिए लिखित में आदेश भी दिया था लेकिन अब नए स्वास्थ्य मंत्री उनियाल जी अपनी ऐंठ में रहते हैं तो हम भी 2 हजार अभ्यर्थियों और उनके परिवार एकजुट हैं। अब तक तो हमारा आंदोलन शांतिपूर्वक था लेकिन हमारी मांगें नहीं मानी गई तो हम आंदोलन को और भी बड़ा करेंगे।
नवल पुंडीर, अध्यक्ष, नर्सिंग एकता मंच, उत्तराखण्ड
सरकार पूरी तरह से बहरी हो चुकी है। जनता की मांगों को अनसुना करके आंदोलन को खत्म करने का काम करती है। प्रदेश का हर आदमी आंदोलनकारी है जो प्रदेश के युवाओं की, महिलाओं की बात करे उनकी मांगों के पक्ष में खड़े होने का प्रदेश के हर नागरिक को अधिकार है।
ज्योति रौतेला, अध्यक्ष, उत्तराखण्ड महिला कांग्रेस