Uttarakhand

हरिद्वार-रुड़की एआरटीओ कार्यालय बिना चढ़ावा चढ़ाए नहीं होता है काम

  • अली खान

 

प्रदेश के मुखिया पुष्कर सिंह धामी ‘जीरो टाॅलरेंस’ नीति के तहत सूबे में भ्रष्टाचार खत्म करने के दावे करते रहे हैं लेकिन उनके इन दावों की हरिद्वार-रुड़की एआरटीओ कार्यालय में जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं

सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रदेश को लगातार भ्रष्टाचार मुक्त करने के प्रयास करने में लगे हुए हैं। बडे़-बड़े मंचों से मुख्यमंत्री धामी द्वारा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का वायदा भी जनता से किया जाता रहा है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके इसके लिए प्रदेश सरकार ने जनहित में एक टोल फ्री नम्बर (1064) भी लाॅच किया हुआ है। इस नम्बर को डायल करने से पीड़ित फौरन अपनी बात को सरकार तक पहुंचा सकता है लेकिन धामी के इन अथक प्रयासों की कुछ विभाग के अधिकारी सरेआम खिल्ली उड़ा रहे हैं। प्रदेश में जमकर घूसखोरी की जा रही है जिसका असर सीधी-साधी जनता की जेब पर पड़ रहा है।

उत्तराखण्ड में आए दिन कहीं न कहीं से रिश्वतखोरी के मामले सामने आ रहे हैं। आरोपियों को भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार कर जेल भी भेजा जा रहा है। ऐसा नहीं है कि यह भ्रष्टाचार सिर्फ एक विभाग में है। तमाम सरकारी दफ्तरों में बैठे कर्मचारी रिश्वत मांगते पकड़े जा चुके हैं। सवाल ये है कि आखिरकार रिश्वत के मामले इतने क्यों बढ़ रहे हैं? क्या बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता? आए दिन सरकारी कर्मचारी या अधिकारी काम करने के एवज में घूस मांगते हुए विजिलेंस द्वारा रंगे हाथों धरे जा रहे हैं जिसके बाद आवाज उठने लगी है कि जिस तरह से नकल विरोधी कानून या फिर भू-कानून धामी सरकार लेकर आई है, ठीक उसी तरह से सरकारी विभागों पर सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए यहां एंटी करप्शन कानून भी लाया जाना चाहिए।

हरिद्वार-रुड़की स्थित एआरटीओ कार्यालय में पूरी तरह भ्रष्टाचार व्याप्त है। यहां लोगों को छोटे से छोटा काम करवाने के लिए रिश्वत का सहारा लेना पड़ता है। अगर लोग चढ़ावा नहीं चढ़ाते हैं तो उनका कोई काम नहीं होता है। यदि कोई सुविधा शुल्क के बिना काम करवाना भी चाहे तो उसे ऊपर-नीचे, यहां-वहां के चक्कर कटवाए जाते हैं जिसके बाद थक-हारकर फिर ग्राहक एजेंट और दलाल की शरण में पहुंच जाता है। यहीं से भ्रष्टाचार का पूरा खेल शुरु होता है। एजेंट काम करवाने के एवज में सर्विस चार्ज से ज्यादा पैसे मांगते हैं। तब काम आसानी से हो जाता है क्योंकि अंदर बैठे कर्मचारियों तथा अधिकारियों को भी एजेंट द्वारा वसूले गए सुविधा शुल्क में से हिस्सा मिल जाता है। पकड़े जाने के डर से कर्मचारी और अधिकारी कभी भी सीधे पैसे नहीं मांगता।

सूत्रों के अनुसार चाहे वाहन ट्रांसफर सम्बंधी कार्य हो या लाइसेंस सम्बंधी काम सभी में सुविधा शुल्क देना ग्राहक की मजबूरी बन गई है। जानकारों का कहना है कि अधिकारी अपनी मनमर्जी से जब चाहे इस सुविधा शुल्क की रकम को बढ़ा भी देते हैं। समय-समय पर ऐसा हुआ भी है। एक अधिकारी द्वारा पिछले डेढ से दो साल के भीतर दो बार इस सुविधा शुल्क को बढ़ाया गया है। ऐसा नहीं है कि भ्रष्टाचार के इन मामलों की भ्रष्टाचार निरोधी संस्थाओं को पता नहीं है बल्कि कई बार यहां विजिलेंस या पुलिसिया कार्रवाई हो चुकी है लेकिन कार्रवाई का असर सिर्फ अल्प समय तक ही सीमित रहता है। फिर से भ्रष्टाचार का खेल पुराने ढर्रे पर चालू हो जाता है।

पीड़ित लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस एआरटीओ कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कार्रवाई अमल में लानी चाहिए। ताकि भोलीभाली जनता की जेब पर पड़ने वाली डकैती पर अंकुश लग सके और प्रदेश के मुखिया धाकड़ धामी के प्रयास भी सफल हो सके। बे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रदेश को लगातार भ्रष्टाचार मुक्त
करने के प्रयास करने में लगे हुए हैं। बडे़-बड़े मंचों से मुख्यमंत्री धामी द्वारा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का वायदा भी जनता से किया जाता रहा है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके इसके लिए प्रदेश सरकार ने जनहित में एक टोल फ्री नम्बर (1064) भी लाॅच किया हुआ है। इस नम्बर को डायल करने से पीड़ित फौरन अपनी बात को सरकार तक पहुंचा सकता है लेकिन धामी के इन अथक प्रयासों की कुछ विभाग के अधिकारी सरेआम खिल्ली उड़ा रहे हैं। प्रदेश में जमकर घूसखोरी की जा रही है जिसका असर सीधी-साधी जनता की जेब पर पड़ रहा है।
  • बिना सुविधा शुल्क के नहीं होता है काम।
  • दो साल में दो बार बढ़ाया गया सुविधा शुल्क।
  • प्राइवेट लोगों से एजेंट करते हैं डील।
  • किसकी फाइल पूरी और किसकी अधूरी रखनी है यह तय होता है एजेंट के इशारों पर।
  • एजेंटों की एंट्री बैन करने के लिए लगाई गई पुलिस फिर भी पीछे के दरवाजे से होती है एंट्री।
  • साहब के आने से पहले और जाने के बाद एजेंटों का होता है कार्यालय में पदार्पण।
उत्तराखण्ड में आए दिन कहीं न कहीं से रिश्वतखोरी के मामले सामने आ रहे हैं। आरोपियों को भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार कर जेल भी भेजा जा रहा है। ऐसा नहीं है कि यह भ्रष्टाचार सिर्फ एक विभाग में है। तमाम सरकारी दफ्तरों में बैठे कर्मचारी रिश्वत मांगते पकड़े जा चुके हैं। सवाल ये है कि आखिरकार रिश्वत के मामले इतने क्यों बढ़ रहे हैं? क्या बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता? आए दिन सरकारी कर्मचारी या अधिकारी काम करने के एवज में घूस मांगते हुए विजिलेंस द्वारा रंगे हाथों धरे जा रहे हैं जिसके बाद आवाज उठने लगी है कि जिस तरह से नकल विरोधी कानून या फिर भू-कानून धामी सरकार लेकर आई है, ठीक उसी तरह से सरकारी विभागों पर सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए यहां एंटी करप्शन कानून भी लाया जाना चाहिए।

हरिद्वार-रुड़की स्थित एआरटीओ कार्यालय में पूरी तरह भ्रष्टाचार व्याप्त है। यहां लोगों को छोटे से छोटा काम करवाने के लिए रिश्वत का सहारा लेना पड़ता है। अगर लोग चढ़ावा नहीं चढ़ाते हैं तो उनका कोई काम नहीं होता है। यदि कोई सुविधा शुल्क के बिना काम करवाना भी चाहे तो उसे ऊपर-नीचे, यहां-वहां के चक्कर कटवाए जाते हैं जिसके बाद थक-हारकर फिर ग्राहक एजेंट और दलाल की शरण में पहुंच जाता है। यहीं से भ्रष्टाचार का पूरा खेल शुरु होता है। एजेंट काम करवाने के एवज में सर्विस चार्ज से ज्यादा पैसे मांगते हैं। तब काम आसानी से हो जाता है क्योंकि अंदर बैठे कर्मचारियों तथा अधिकारियों को भी एजेंट द्वारा वसूले गए सुविधा शुल्क में से हिस्सा मिल जाता है। पकड़े जाने के डर से कर्मचारी और अधिकारी कभी भी सीधे पैसे नहीं मांगता।

सूत्रों के अनुसार चाहे वाहन ट्रांसफर सम्बंधी कार्य हो या लाइसेंस सम्बंधी काम सभी में सुविधा शुल्क देना ग्राहक की मजबूरी बन गई है। जानकारों का कहना है कि अधिकारी अपनी मनमर्जी से जब चाहे इस सुविधा शुल्क की रकम को बढ़ा भी देते हैं। समय-समय पर ऐसा हुआ भी है। एक अधिकारी द्वारा पिछले डेढ से दो साल के भीतर दो बार इस सुविधा शुल्क को बढ़ाया गया है। ऐसा नहीं है कि भ्रष्टाचार के इन मामलों की भ्रष्टाचार निरोधी संस्थाओं को पता नहीं है बल्कि कई बार यहां विजिलेंस या पुलिसिया कार्रवाई हो चुकी है लेकिन कार्रवाई का असर सिर्फ अल्प समय तक ही सीमित रहता है। फिर से भ्रष्टाचार का खेल पुराने ढर्रे पर चालू हो जाता है।

पीड़ित लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस एआरटीओ कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कार्रवाई अमल में लानी चाहिए। ताकि भोलीभाली जनता की जेब पर पड़ने वाली डकैती पर अंकुश लग सके और प्रदेश के मुखिया धाकड़ धामी के प्रयास भी सफल हो सके।

बात अपनी-अपनी

अगर एआरटीओ कार्यालय में भ्रष्टाचार की बात सही निकली तो भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने में संकोच कतई नहीं किया जाएगा। प्रदेश के मुखिया पुष्कर सिंह धामी का सपना भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाना है, जिसे साकार करने के प्रयास किए जा रहे हैं और किए जाते रहेंगे।
प्रदीप बत्रा, कैबिनेट मंत्री एवं विधायक, रुड़की

मुझे किसी प्रकार के भ्रष्टाचार की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा हो रहा है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जितेंद्र चंद, आरटीओ, रुड़की-हरिद्वार

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