Uttarakhand

‘वाह, हल्द्वानी मेरा सपना’

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से राजनीतिक सफर शुरू करने वाले गजराज सिंह बिष्ट को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी का शिष्य कहा जाता है। बिष्ट को भाजपा ने हल्द्वानी नगर निगम में महापौर पद पर चुनाव लड़ाने के लिए मैदान में उतारा है। इससे पूर्व वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश भाजपा में महामंत्री और किसान मोर्चा में काम करने के बाद मंडी परिषद के अध्यक्ष भी रहे। गजराज बिष्ट से ‘दि संडे पोस्ट’ विशेष संवाददाता संजय स्वार की बातचीत

भाजपा के 36 वर्षों की सेवा और काफी जद्दोजहद के बाद आपको चुनावी समर में उतारा है। कैसा महसूस करते हैं?
ये बात ठीक है कि 36 सालों बाद मुझे पार्टी ने टिकट दिया है लेकिन कोई जद्दोजहद के बाद नहीं मिला है। जब मैं पहली बार माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी से मिला तो उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रख कर कहा जाओ खुश रहो। एक बड़े नेता का ऐसा आत्मीय व्यवहार मेरे लिए एक इशारे की तरह था। मैं उसी दिन आश्वस्त हो गया था कि पार्टी मुझे ही हल्द्वानी से प्रत्याशी बनाएगी। जब मैं वापस लौटा तो कई लोगों के प्रश्न थे कि अगर आपको टिकट मिलता है तो…..? मैंने उनसे कहा था कि आपको मेरे टिकट पर संशय क्यों है? क्योंकि मुख्यमंत्री जी से मिलने के बाद मुझे अपने टिकट पर कोई संशय था ही नहीं। शायद आपको जानकारी न हो मुख्यमंत्री जी मेरे प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं युवा मोर्चा में, मैं तब उनके साथ प्रदेश उपाध्यक्ष था, साथ ही वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट भी युवा मोर्चा में मेरे प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं युवा मोर्चा में। जब दो ऐसे व्यक्तियों के साथ मैंने काम किया हो जो इस समय प्रदेश में शीर्ष पदों में हैं तो मुझे नहीं लगता कि जद्दोजहद जैसी कोई बात रही है। सब कुछ शीशे की तरह साफ था हां मीडिया में कयास तो चलते ही रहते हैं।

शुरुआत में आपको टिकट के लिए चुनौतियों का सामना तो करना ही पड़ा, आपने इसमें सामंजस्य कैसे बैठाया?
चुनौतियांे का सामना तो नहीं कह सकते इसे क्योंकि भारतीय जनता पार्टी में जो काम कर रहा है उसे टिकट मांगने का अधिकार है। जैसे मुझे है। उसी प्रकार दूसरे को भी है। आपको जानकर हैरान होगी कि अपने टिकट की जानकारी मुझे नहीं थी मुझे ये जानकारी हमारे निवर्तमान मेयर डॉ. जोगेंद्र रौतेला जी ने दी। उनका पहला फोन था। टिकट की घोषणा के आधे घंटे के भीतर बंशीधर भगत, रेनू अधिकारी, प्रमोद तोलिया, कौस्तुमानंद जोशी सहित कई शीर्ष नेताओं के फोन मुझे आ गए। ये जो आपको आपसी प्रतिद्वंदिता नजर आती है वो टिकट मिलने तक रहती है उसके बाद तो हमारा लक्ष्य एक ही रहता है पार्टी को जिताना प्रत्याशी भले ही कोई भी हो।

संघ से लेकर भाजपा और फिर पार्टी के पदाधिकारी दायित्वधारी तक का सफर कैसा रहा?
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शीर्ष नेतृत्व में आलोक जी हैं वो हल्द्वानी में संघ के नगर प्रचारक हुआ करते थे, उनके सानिध्य में मेरा संघ में सफर शुरू हुआ। 1987 से मेरी सामाजिक जीवन और राजनीतिक यात्रा चली आ रही है। फिर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखण्ड भाजपा में प्रदेश महामंत्री, किसान मोर्चा, मंडी परिषद अध्यक्ष के नाते काम किया।

मंडी परिषद के अध्यक्ष के रूप में आपको प्रशासनिक अनुभव भी है तो एक राजनीतिक प्रशासक के अनुभवों के आधार पर नगर निगम प्रत्याशी के रूप में हल्द्वानी नगर निगम के लिए कोई रोडमैप या परिकल्पना है?
मैं मंडी परिषद का अध्यक्ष महज 15-16 माह के लिए रहा ये कोई बड़ा कार्यकाल नहीं कहा जा सकता लेकिन इस छोटे कार्यकाल में मैंने गदरपुर की बड़ी मंड़ी, रूद्रपुर की गल्ला मंड़ी का शिलान्यास किया। रूद्रपुर में अभी काम चल रहा है जबकि गदरपुर मंड़ी का शुभारंभ हो चुका है। मंड़ी परिषद अध्यक्ष के रूप में मैंने मंडुआ सहित कई पहाड़ी उत्पादों का किसानों के लिए लाभकारी मूल्य तय करवा कर किसानों को पहाड़ी उत्पाद की ओर प्रेरित किया। अगर जनता मुझे मेयर चुनती है तो मैं हल्द्वानी के सभी नागरिकों जिनमें शहर के बुद्विजीवी और आम नागरिकों की सलाह से शहर के विकास का खाका खींचा जाएगा। हमारे निवर्तमान मेयर डॉ. जोगेंद्र पाल सिंह रौतेला का पिछले दस सालों का कार्यकाल शानदार रहा है। हल्द्वानी ने काफी प्रगति की है। मुख्यमंत्री जी का हल्द्वानी के प्रति प्रेम ही रहा है जिसके चलते हल्द्वानी के विकास के लिए 2200 करोड़ का पैकेज वो लाए। बंशीधर भगत, अजय भट्ट, मोहन सिंह बिष्ट जी सहित कई नेता इस विकास में सहभागी रहे है। मैं ऐसा हल्द्वानी बनाना चाहता हूं जहां बाहरी व्यक्ति प्रवेश करते ही ‘वाह, हल्द्वानी’ बोल उठे।

हल्द्वानी को नगर निगम का दर्जा मिले दस वर्ष हो चुके हैं। क्या आपको लगता है कि नगर निगम लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरा है, खासकर उन इलाकों में जो 2018 में नगर निगम में नए जोड़े गए थे क्योंकि ये इलाके अभी भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं?
ऐसा कहना उचित नहीं होगा कि नगर निगम अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा पिछले 10 वर्षों में काफी कार्य हुआ है। आप देखिए नई पेयजल लाइन, सीवर लाइन बिछ रही है, नई सड़के बन रही हैं, स्ट्रीट लाइटें लग रही है। हां सब कुछ इतनी जल्दी नहीं हो सकता। नगर निगम क्षेत्र ही क्यों हल्द्वानी से जुड़े ग्रामीण इलाकों में भी विकास कार्य होते हुए आप देख सकते हैं।

नगर निगमों को छोटी सरकार कहा जाता है। मेयर के चुनावराजनीतिक दलों के लिए साख का प्रश्न बन गए हैं लेकिन नगर निगमों को जब स्वास्यत्तता देने की बात आती है तो सरकारें हाथ खींच लेती हैं। क्या आपको नहीं लगता कि मेयर के अधिकारों में बढ़ोतरी होनी चाहिए?
मुझे नहीं लगता कि मेयर के अधिकार कुछ कम हैं या नगर निगमों की स्वायत्ता पर कुछ अंकुश है। हां अगर भविष्य में लगेगा कि मेयर के अधिकार कम हैं और नगर निगम में त्वरित निर्णय के लिए मेयर के अधिकारों में बढ़ोत्तरी की जरूरत है तो सरकार से मांग करेंगे। फिलहाल अभी प्राथमिकता नगर निगम चुनाव हैं।

सिर्फ हल्द्वानी नगर निगम ही नहीं हम समग्र परिपेक्ष में बात करें तो एक धारणा बनी है कि नगर निगमों में पारदर्शिता का अभाव है और निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन गए हैं। क्या कहेंगे?
देखिए इसमें दो बातें हैं निवर्तमान मेयर डॉ. जोग्रेंद्र पाल सिंह रौतेला की ईमानदारी पर कोई अंगुली नहीं उठा सकता। जहां तक मेरा सवाल है मेरे लिए कोई नहीं कह सकता की मेरे द्वारा कोई भ्रष्टाचार किया गया या कोई गलत काम किया गया। हां अगर मैं मेयर चुना जाता हूं तो आपको नगर निगम के कामों में और पारदर्शिता देखने को मिलेगी।

अगर हम दस सालों को छोड़कर भविष्य की ओर देखें तो गजराज सिंह बिष्ट किन परिकल्पनाओं के साथ हल्द्वानी को देखना चाहते हैं?
देखिए हल्द्वानी का विकास भाजपा की प्राथमिकताओं में रहा है विकास की कड़ियों में हम पिछले दस सालों की अहमियत कम नहीं आंक सकते भविष्य की योजनाएं अतीत के अनुभवों के साथ ही बनाई जाती हैं। हल्द्वानी में नया बाईपास बने, रिंग रोड की योजना धरातल पर उतरे। जहां सीवर लाइन नहीं हैं वहां सीवर लाइन का विस्तार हो। नगर निगम में जो नए क्षेत्र जुड़े थे उनमें मूलभूत सुविधाओं की कमी को पूरा किया जाए। कोई क्षेत्र विकास में पिछड़े नहीं। विकास बिना भेदभाव के हो। साथ ही मेयर बनने के बाद नए क्षेत्रों को खोजेंगे जिनके बल पर हम हल्द्वानी को एक नई पहचान दे सकें।

एक मेयर प्रत्याशी के रूप में आपके सामने अपनी पार्टी के अंदर और जनता के बीच कितनी चुनौतियां हैं?
देखिए, प्रत्याशी चयन के बाद पार्टी के अंदर की चुनौतियां नहीं हैं क्योंकि जिस चयन प्रक्रिया से प्रत्याशी का चयन होता है उसमें पार्टी कार्यकर्ता, बूथ लेवल से लेकर ऊपर स्तर तक राय लेती है। मेरे पक्ष में बूथ लेवल से लेकर शीर्ष तक के पदाधिकारी थे। जिन 130 लोगों से राय ली गई थी उनमें से 123 लोग मेरे पक्ष में थे। आप क्षेत्र में घूम कर देखिए हर वर्ग, हर दल से जुड़ा व्यक्ति किसी न किसी रूप में मेरी उम्मीदवारी के पक्ष में था। आपको जानकर हैरानी होगी कि भाजपा के अलावा कांग्रेस, बसपा सहित अन्य राजनीतिक दलों के लोगों की सहानुभूति गजराज बिष्ट के साथ है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और गजराज बिष्ट के बीच संवादहीनता और तल्खियों की चर्चा आम थी कितनी सच्चाई है इनमें?
ये बातें मीडिया की उपज हो सकतीं हैं। मुख्यमंत्री जी और मेरे बीच ऐसी कोई तल्खी कभी नहीं रही। हमारे संबंध हमेशा सहज रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल को आप कैसे देखते हैं?
पुष्कर सिंह धामी जी का युवा नेतृत्व प्रदेश को विकास के रास्ते पर ले जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी के चलते उत्तराखण्ड विकास की नई इबारत लिख रहा है। हम इसे सिर्फ हल्द्वानी तक सीमित न रखें तो आप देखेंगे कि उत्तराखण्ड का कोई कोना विकास से अछूता नहीं है। युवा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखण्ड विकास की राह पर है।

वर्ष 1995 में छात्र संघ के प्रतिद्वंदी 2025 में फिर आमने- सामने हैं। कैसा लग रहा है?
देखिए, यहां लड़ाई विचारधारा की है व्यक्ति की नहीं। मेरे सामने कांग्रेस है। एक तरफ कांग्रेस का विचार है दूसरी तरफ मेरी पार्टी का विचार है तो ये लड़ाई विचारधाराओं की है। यहां पर हम विचारधारा के स्तर पर प्रतिद्वंद्वी हैं।

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