कुछ दिनों से सियासी गलियारों में चर्चाएं इस बात की हो रही थीं कि मायावती इंडिया गठबंधन का हिस्सा हो जाएंगी। गत् दिनों कांग्रेस ने अपने बड़े नेताओं के माध्यम से संपर्क कर गठबंधन में आने की बात की थी लेकिन बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर ऐलान किया कि वह बगैर गठबंधन के ही आगामी आम चुनाव के सियासी मैदान में उतरने जा रहीं हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या मायावती इंडिया अलायंस का खेल बिगाड़ने वाली हैं। क्योंकि सपा बसपा और कांग्रेस के सियासी गठबंधन को चुनावी नजरिए से बेहद मजबूत माना जा रहा था। जिस पर मायावती ने पानी फेर दिया है। फिलहाल अब इस फैसले के बाद मायावती जल्द ही अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर सकती हैं। इससे पहले कहा जा रहा था कि अगर बहुजन समाज पार्टी इस समूह में शामिल हो जाती है, तो मुस्लिम और दलितों के बड़े बिखराव को रोका जा सकता है। सियासी जानकार भी मानते हैं कि सपा, बसपा और कांग्रेस का गठबंधन होता है तो निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश में सियासत की एक दूसरी तस्वीर सामने आ सकती है। अगर सपा बसपा और कांग्रेस मिलकर सियासी मैदान में उतरती, तो बसपा के 19 फीसदी वोटों से कई सियासी समीकरण साधे जा सकते थे। जानकारों का मानना है कि बहुजन समाज पार्टी जिस तरह मुस्लिम और दलित प्रत्याशियों पर दांव लगा रही है, उससे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की सियासी गणित बिगाड़ सकती है। पिछले कुछ चुनाव में भी इसी जातिगत समीकरण को साधते हुए बसपा ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। ऐसे में इस लोकसभा चुनाव में भी अगर बसपा इस तरह प्रत्याशी मैदान में उतारती है, तो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के मतदाताओं में सेंधमारी हो सकती है जो कि सियासी नजरिए से समाजवादी और कांग्रेस के लिए मुफीद नहीं है।
बसपा बढ़ाएगी गठबंधन की मुश्किलें!

