देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी इन दिनों अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की खोज में है। वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 2022 में ही खत्म हो गया था लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उसे बढ़ाकर 30 जून 2024 तक कर दिया गया था। मगर अभी तक पार्टी नए अध्यक्ष का चयन नहीं कर पाई है। ऐसे में सियासी गलियारों में उन नामों पर चर्चा होने लगी है जो पार्टी अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस के नाम की हो रही है। कहा जा रहा है कि फडणवीस ही बीजेपी के नए अध्यक्ष होंगे। इसके पीछे कई सारे तर्क दिए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है कि फडणवीस के अध्यक्ष बनने से बीजेपी और आरएसएस के बीच चल रही तनातनी खत्म हो सकती है जिसकी मौजूदा समय में पार्टी को सबसे ज्यादा जरूरत है। गौरतलब है कि फडणवीस नागपुर से आते हैं। नागपुर में आरएसएस का मुख्यालय भी है। उन्हें संघ का करीबी माना जाता है। आरएसएस के शीर्ष नेताओं से उनके संबंध भी अच्छे हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि वैसे तो पूरे देश की सियासत में आरएसएस प्रभाव डालता है लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में यह प्रभाव कहीं ज्यादा देखने को मिलता है। ऐसे में बीजेपी और आरएसएस के बीच में आई खटास को दूर करने की सबसे ज्यादा जरूरत है क्योंकि अगले कुछ महीनों में ही महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी अध्यक्ष नड्डा ने कहा था कि बीजेपी अपने आप में सक्षम है। उसे अब संघ की जरूरत नहीं है। जिसके चलते शीर्ष से लेकर जमीनी स्तर तक स्वयं सेवकों में नाराजगी देखने को मिली थी। माना जा रहा है कि संघ की इस नाराजगी का असर लोकसभा चुनाव के नतीजों में भी दिखाई दिया है। अब महाराष्ट्र में चुनाव हैं। ऐसे में देवेंद्र फडणवीस को पार्टी की कमान सौंपना पार्टी को दोगुना फायदा दे सकता है। एक तो महाराष्ट्र की जनता पर स्थानीय नेता के शीर्ष पद पर पहुंचने से असर पड़ेगा। साथ ही संघ का करीबी होने के चलते उससे भी रिश्ते सुधरने की गुंजाइश रहेगी जिसका फायदा बीजेपी को महाराष्ट्र चुनाव में मिलेगा।
सेनापति बनेंगे फडनवीस!

