•     संजय चौहान

 

पर्यटकों की पहली पसंद बन रहा मोनाल ट्रैक। विंटर टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में हो रहा है विकसित। यहां से हिमालय के अभिभूत कर देने वाले सौंदर्य के होते हैं दीदार

सीमांत जनपद चमोली के देवाल ब्लॉक के वाण गांव से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है खूबसूरत मोनाल टैªक। पिछले साल अक्टूबर माह में वाण गांव के दो ट्रैकर देवेंद्र बिष्ट और हीरा सिंह गढ़वाली नें एक बेहद खूबसूरत और गुमनाम मोनाल ट्रैक को खोज निकाला था। इस पूरे ट्रैक में हिमालय दर्शन के जरिए हिमालय को करीब से देखने का मौका मिलता है। नए साल में 10 ग्रुप यहां पहुंच चुके हैं। यहां पहुंचकर पर्यटक हिमालय के बेपनाह सौंदर्य को देखकर अभिभूत हो गए थे। बैंगलोर, गुजरात, मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से यहां पहुंचे पर्यटकों का मानना है कि उन्होंने इससे खूबसूरत ट्रैकिंग रूट पहले कभी नहीं देखा। वे हर बार यहां आना चाहेंगे।

हिमालय में मौजूद प्रकृति की अनमोल नेमत है मोनाल ट्रैक!
हिमालय के कोने- कोने की खाक छानने वाले पर्यटकों के लिए मोनाल ट्रैक किसी रहस्य और रोमांच से कम नहीं है। यहां आकर ऐसा लगता है कि धरती पर अगर कहीं जन्नत है तो वो यहीं हैं। चारों ओर जहां भी नजर जाती है हिमालय की केदारनाथ, चौखंभा, नंदा देवी, हाथी घोडा पर्वत, त्रिशूल सहित गगनचुंबी हिमाच्छादित चोटियों और मखमली घास के बुग्याल के दीदार होते हैं। लगभग साढे बारह हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित मोनाल ट्रैक मन को आनंदित कर देता है। इस ऊंचाई पर पहुंचने के बाद एक तरफ पूरा घाट ब्लॉक का भूगोल और तातडा में द्यो सिंह देवता और रामणी के बालपाटा, नरेला बुग्याल नजर आता है तो दूसरी तरफ कैल और पिंडर घाटी का भूगोल दिखाई देता है। जबकि सामने एशिया के सबसे बडे़ मखमली घास के बुग्याल वेदनी और आली दिखाई देता है। उसके पास रहस्यमयी रूपकुण्ड और ब्रह्माकमल की फुलवारी भगुवासा नजर आती है। जबकि बर्फीली हवाएं जिस ओर से आती हैं तो बिल्कुल सामने नंदा घुंघुटी और त्रिशूल की हिमाच्छादित शिखर पर्यटकों से गुफ्तगु करने को मानो तैयार खड़ा है। कुछ देर प्रकृति के नजारों का लुत्फ उठाते- उठाते कई जगहों पर राज्य पक्षी मोनालों का झुंड विचरण करता हुआ दिखाई देगा। देवाल ब्लॉक के वाण गांव निवासी और रूपकुण्ड टूरिज्म के सीईओ देवेंद्र सिंह कहते हैं कि यहां मोनालों की प्रचुरता की वजह से ही स्थानीय लोग इसे मुन्याव ट्रैक यानी की मोनाल ट्रैक कहते हैं। वे कहते हैं कि इस ट्रैक पर हिमालय के सदूरवर्ती गांव, बुग्यालों, ताल, पेड़ों, जंगली जानवरों, पक्षियों और पहाड़ की संस्कृति के दीदार होते हैं। यहां से हिमालय की कई पर्वत श्रेणी और मखमली बुग्यालों को देखा जा सकता है। यहां राज्य वृक्ष बुरांस, राज्य पक्षी मोनाल, राज्य पशु कस्तूरी मृग भी देखने को मिलते हैं। इसके अलावा हजारों प्रकार के फूल और वनस्पति भी रोमांचित कर देती हैं। इस ट्रैक को वन्य जीव टूरिज्म के रूप में भी विकसित किया जा सकता है।

गढ़भूमि एडवेंचर के सीईओ हीरा सिंह गढ़वाली कहते हैं कि मोनाल ट्रैक प्रकृति का अनमोल खजाना है। लेकिन तमाम खूबियों के बाद भी मोनाल ट्रैक आज भी देश दुनिया के पर्यटकों की नजरों से ओझल है। सरकार और पर्यटन विभाग को चाहिए की मोनाल ट्रैक को पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

दो ट्रेकरों नें खोजा निकाला था न्यू टूरिज्म डेस्टिनेशन
सीमांत जनपद चमोली के वाण गांव के दो ट्रैकर देवेंद्र बिष्ट और हीरा सिंह गढ़वाली ने 5 साल पहले बेहद खूबसूरत और गुमनाम मोनाल ट्रैक को खोज निकाला था। इस पूरे ट्रैक में हिमालय दर्शन के जरिए हिमालय को करीब से देखने का मौका मिलता है। विगत दिन इस ट्रैक का भ्रमण करके लौटे ट्रैकर लक्ष्मण सिंह और कुंवर सिंह ने कहा कि यहां का अभिभूत कर देने वाला अप्रतिम सौंदर्य हर किसी को आनंदित करता है। यहां से सनराइज और सर्दियों में विंटर लाइन बेहद रोमांचित करता है। चमोली में इससे ज्यादा खूबसूरत ट्रैकिंग रूट और कोई नहीं है।

ऐसे पहुंचा जा सकता है मोनाल ट्रैक
ऋषिकेश से वाण गांव     275 किलोमीटर वाहन द्वारा या
काठगोदाम से वाण तक 250 किमी. वाहन द्वारा
वाण से कुकीना- खाल   4 किमी. पैदल
कुखीना खाल से हुनेल -5 किमी.
हुनेल से मोनाल टॉप-    3 किमी. पैदल।

 

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