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गोदियाल के बहाने टीम हृदयेश पर निशाना

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत इन दिनों अपना सारा फोकस 2022 में होने वाले राज्य विधानसभा के चुनावों की रणनीति अपने हिसाब से बनाने में लगा रहे हैं। असम में कांग्रेस की स्थिति मजबूत कर राहुल गांधी का विश्वास जीते रावत ने पंजाब का प्रभारी बनने के साथ ही छौका मार कांग्रेस आलाकमान पर अपनी पकड़ मजबूत कर डाली। पंजाब के सीएम अमेरिंदर सिंह और उनके घोर विरोधी नवजोत सिद्दू को आपसी मतभेद भुलाने के लिए तैयार करने वाले रावत अब अपने गृह प्रदेश में वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह द्वारा संगठन से बाहर किए गए अपने समर्थकों के पुनर्वास मिशन पर जुटे बताए जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों की माने तो रावत को कांग्रेस आलाकमान से राज्य में कांग्रेस संगठन को चुस्त-दुरस्त करने के लिए हरी झण्डी मिल चुकी है। सूत्रों की माने तो रावत के मिशन पुनर्वास का पहला कदम वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के स्थान पर अपने समर्थक नेता गणेश गोदियाल की ताजपोशी करना है। 2002 में भाजपा के कद्दावर नेता डाॅ ़ निशंक को पराजित कर विधायक बनने वाले गोदियाल प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के धुर विरोधी हैं। गोदियाल को खासा मलाल है कि 2017 में उनकी चुनावी हार का कारण बने निर्दलीय मोहन काला को इंदिरा हृदयेश का समर्थन मिलता रहा है यदि रावत अपने मिशन में सफल होते हैं तो न केवल प्रदेश संगठन में उनकी पकड़ मजबूत हो जाएगी साथ ही पार्टी छोड़ भाजपा में गए कुछ बड़े नेताओं की वापसी भी वे बेरोकटोक करा सकेंगे। रावत के करीबियों का दावा है कि बाकियों की वापसी की बात अपने अंतिम दौर पर है। यदि गोदियाल प्रदेश अध्यक्ष बने और रावत अपने बागी हुए साथियों की वापसी करा पाए तो 2022 में उनका सीएम चेहरा बनना तय माना जा रहा है।

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