बिहार में इन दिनों राजनीतिक तापमान बेहद गर्म है। एक तरफ नीतीश बाबू के एक बार फिर से एनडीए छोड़ने की अटकलें तेज हो चली हैं तो दूसरी तरफ जनसुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर विगत दिनों पटना पुलिस द्वारा छात्रों पर किए गए लाठी चार्ज बाद नीतीश सरकार पर खासे हमलावर हो चले हैं। कानाफूसियों का बाजार भारी उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है। चर्चा तेज है कि जद(यू) के कुछ नेता इस वर्ष के अंत में प्रस्तावित राज्यसभा चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व में बदलाव की मांग कर सकते हैं और मांग न माने जाने की स्थिति में पार्टी छोड़ भाजपा अथवा राजद में शामिल हो सकते हैं।

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