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सिंधिया पर पोस्टर वार, राजनीतिक कद कम करने का प्रहार

सिंधिया पर पोस्टर वार, राजनीतिक कद कम करने का प्रहार

एक सप्ताह तक कोरोना से लड़ाई लड़ने के बाद जब भाजपा के युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश पहुंचे तो उन्हें जितना कोरोना की लड़ाई जीतने की खुशी थी उससे ज्यादा उनके चेहरे पर दुख के बादल मंडरा रहे थे। कारण यह है कि सांवेर विधानसभा के उपचुनाव में उनके पोस्टर में उनका सबसे नीचे फोटो लगाया गया है। यह फोटो देखकर ऐसे लग रहा है कि जैसे कोई नया बच्चा पार्टी का नया नेता बना हो।

हालांकि, इस पोस्टर के ऊपर मुख्यमंत्री और कैलाश विजयवर्गीय के फोटो लगे हैं। जबकि नीचे उनके बेटे आकाश विजयवर्गीय का लगा है। इस पोस्टर पर कांग्रेस ने कटाक्ष करते हुए कहा गया कि भाजपा में जाकर महाराज बच्चे बन गए।

यह पहला पोस्टर नहीं है जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए मुसीबत बना है। बल्कि उससे पहले भाजपा के ही कुछ नेताओं ने उनके ही गढ़ ग्वालियर में लगे पोस्टरों में उनका फोटो तक गायब कर दिया था। जबकि इससे पहले सिंधिया के गुमशुदगी के पोस्टर चर्चा का विषय बने थे।

इन पोस्टर वार से ज्योतिरादित्य सिंधिया की राजनीतिक कद कम करने की किसी साजिश की बू आ रही है। हालांकि, गुमशुदगी के जो पोस्टर लगे उसमें कहा गया कि वह कांग्रेस के नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के इशारे पर लगाए थे।

सिंधिया पर पोस्टर वार, राजनीतिक कद कम करने का प्रहार

जिस पर एक कांग्रेसी नेता के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ था। जबकि बाद के दो पोस्टर जो लगे हैं उनमें उनमें भाजपा ने ही सिंधिया के पद पर तलवार चलाने का काम किया। कहा भी जाने लगा है कि धीरे-धीरे भाजपा सिंधिया को पोस्टर वार में फंसा कर उन पर पॉलिटिकली तलवार चला रही है।

हालांकि, कुछ लोगों ने सीधे बीजेपी के रवैये पर यह लिखकर सवाल उठाए हैं कि लगता नहीं पार्टी ने सिंधिया को उनकी हैसियत के हिसाब से स्थान दिया है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने ट्विटर के जरिए सिंधिया की हैसियत पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा है कि उसूलों और सम्मान की बात करने वालों के सम्मान के साथ बीजेपी में रोज खिलवाड़ हो रहा है।

गौरतलब है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने करीब 18 बरस तक कांग्रेस की राजनीति करने के बाद 9 मार्च, 2020 को पार्टी छोड़ दी थी और 11 मार्च को वह विधिवत सदस्यता लेकर बीजेपी में शामिल हो गये थे।

मध्य प्रदेश के डेढ़ दर्जन से ज्यादा उनके समर्थक विधायकों ने भी विधायकी से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया था। इसके बाद कमलनाथ की सरकार गिर गई थी और प्रदेश में बीजेपी पुनः सरकार बनाने में सफल हुई थी।

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