झारखण्ड में भाजपा को सत्ता वापसी की पूरी उम्मीद थी लेकिन चुनाव नतीजे उसकी आशा के ठीक उलट आए और चुनावों से ठीक पहले ईडी की जांच में लपेटे गए, जेल गए हेमेंत सोरेन पूरे दमखम के साथ वापस सत्ता में काबिज हो गए। अब रांची के राजनीतिक गलियारों में बड़ी चर्चा है कि पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रघुबर दास राज्य की राजनीति में रीएंट्रªी करने जा रहे हैं। भाजपा आलाकमान ने 2023 में उड़ीसा का राज्यपाल बना झारखण्ड से दूर कर दिया था लेकिन खांटी राजनीतिज्ञ रघुबर दास को राजभवन की शान शौकत सुहाई नहीं। अब यकायक ही उन्होंने राज्यपाल पद से त्याग पत्र दे इन चर्चाओं को गर्मा दिया है कि वे वापस एक्टिव राजनीति का हिस्सा बनने जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि रघुबर दास पूरे गाजे-बाजे के साथ दोबारा भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। ओबीसी नेता दास की राज्य में खासी जमीनी पकड़ बताई जाती है लेकिन उन पर 2014 से 2019 तक मुख्यमंत्री रहते आदिवासियों के हितों को नजरअंदाज करने का आरोप भी चस्पा है। इसी आरोप चलते उनहें राज्य की राजनीति से दूर कर दिया गया था हालांकि उनकी बहू पूर्णिमा साहू को गत् विधानसभा चुनाव में पार्टी ने जमशेदपुर पूर्वी सीट से टिकट दिया और वह चुनाव भी जीतीं। अब एक बार फिर भाजपा नेतृत्व रघुबर दास के जरिए झारखण्ड में अपनी खोई जमीन वापस पाने का प्रयास करता नजर आ रहा है। यदि ऐसा होता है तो पार्टी के वरिष्ठ नेता अर्जुन मुंडा की राजनीति प्रभावित होगी। खबर गर्म है कि अर्जुन मुंडा रघुवर दास की इस सम्भावित वापसी को रोकने का भरसक प्रयास कर रहे हैं।
फिर रघुबर के हवाले झारखंड

